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केरल ही नहीं, भारत के किसी भी बांध में पानी के वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीके मौजूद नहीं: सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय

बाढ़ के दौरान बांधों के गेट कब और कैसे खोलने हैं, इसकी जानकारी नहीं रहती है लोगों के पास

बाढ़ प्रबंधन प्रणाली के तहत वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पता लगाया जाना चाहिए की बांध और जलाशयों के गेटों को कब खोलना चाहिए और कब नहीं।”

यह कहना है, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव ‘माधवन नायर राजीवन’ का। भारत में किसी भी बांध या जलाशय पर निर्णय सहायक तंत्र के न होने का उन्होंने बेहद ही अफसोस जताया। निर्णय सहायक तंत्र की मदद से बाढ़ के समय कब और कैसे गेटों को खोलना है, इसकी जानकारी मिल जाती है। उन्होंने कहा की भारत में अधिकतर बाढ़ प्रबंधन तंत्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की कमी है जिसे जल्द से जल्द ठीक करना चाहिए।

इंडियन एक्सप्रेस के साथ हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि पिछले दस सालों में हिन्द महासागर में काफी तेज़ी से बदलाव आये हैं। यह बदलाव ख़ास तौर से अरब सागर की ओर ज़्यादा देखे जा रहे हैं। इनकी वजह से पिछले कुछ समय से चक्रवातों में भी बढ़ोतरी देखी गई है।

अपनी बात पर ज़ोर देते हुए राजीवन ने केरल और कर्नाटक के लोगों को ज़्यादा सचेत रहने को कहा। गौरतलब है की पिछले ही साल “ओखी” नामक चक्रवात ने तमिलनाडुकेरल और लक्षद्वीप के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई थी।

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