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चुनाव हारने के बाद अपने ही नेताओं से घिर गए हैं मोदी-शाह, गडकरी बोले- हार का जिम्मा लेने के लिए भी हिम्मत चाहिए

नितिन गडकरी ने कहा है कि जीत का श्रेय लेने के लिए कई नेता आ जाते हैं, लेकिन हार के समय किसी का अता पता नहीं होता

हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में करारी हार के बाद भाजपा के शीर्ष नेताओं को अपनी ही पार्टी के लोगों से ताना सुनना पड़ रहा है. शत्रुघ्न सिन्हा पहले ही शीर्ष नेतृत्व पर हमला बोल चुके हैं. अब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पार्टी के नेताओं की भीतर हार और विफलताओं की ज़िम्मेदारी लेनी की क्षमता भी होनी चाहिए, इससे संस्थान के साथ उनके रिश्ते मजबूत होते हैं.

पुणे के सहकारी बैंक असोसिएशन लिमिटेड द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि सफलता के समय वाहवाही लूटने के लिए कई लोग आ जाते हैं, लेकिन हार के समय किसी का अता पता नहीं होता. हारने के बाद सभी लोग एक-दूसरे की ओर उंगली दिखाने लगते हैं.

न्यूज़18 की रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों के संदर्भ में गडकरी ने कहा कि कई बार बैंक सफल हो जाते हैं और कई बार बैंक बंद भी हो जाते हैं. सहकारी बैंकों की हालातों पर उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंकों को उनका साथ देना चाहिए.

इसी बयान में आगे उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर इशारा करते हुए कहा कि एक इंजन हो तो गाड़ी ठीक प्रकार से चलती है, लेकिन कई इंजन होते हैं तो मुश्किल हो जाती है.

एनडीटीवी की ख़बर के अनुसार पार्टी के एक हारे हुए प्रत्याशी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “एक प्रत्याशी हार के बाद मुझसे शिकायत करने लगा कि मेरा पोस्टर समय पर नहीं छपा गया. जो रैली रखी थी वह कैंसिल हो गई, मुझे समय पर फंड नहीं मिला.” गडकरी ने कहा कि मैंने उस प्रत्याशी से कहा कि तुम इसलिए हारे गए क्योंकि तुम और तुम्हारी पार्टी लोगों का विश्वास जीतने में विफल रहे.

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