NMC बिल के ख़िलाफ़ हड़ताल पर बैठे देशभर के तीन लाख डॉक्टर, जानें क्यों कर रहे हैं नए बिल का विरोध
बिल के अनुसार मेडिकल कॉलेजों के प्रबंधक 50 फीसदी से ज्यादा सीटों को अधिक दर पर बेच पाएंगे. इससे पढ़ाई महंगी हो जाएगी.
लोकसभा में नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) बिल पास होने के बाद डॉक्टरों का विरोध प्रचंड रूप ले चुका है. गुरुवार यानी आज राजधानी दिल्ली के रेजिडेंट्स डॉक्टरों ने एक दिन की हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है. डॉक्टरों का कहना है कि इस विधेयक के पास हो जाने से मेडिकल की पढ़ाई आमजनों के लिए महंगी हो जाएगी. साथ ही इसके तहत वैसे लोगों को भी डॉक्टरी की लाइसेंस मिल जाएगा, जिन्होंने मेडिकल की पढ़ाई नहीं की है.
Delhi: Resident doctors sit on strike in AIIMS (All India Institute Of Medical Sciences) against National Medical Commission (NMC) Bill, 2019. Resident Doctors Association is observing a one-day strike against provisions of National Medical Commission Bill,across the nation today pic.twitter.com/hzaQBGEylu
— ANI (@ANI) August 1, 2019
डॉक्टरों की मांग है कि बिल को जिस तरह लोकसभा में पास किया गया है, उस तरह राज्यसभा में पेश ना किया जाए. बिल में आर्टिकल 15 और 32 में बदलाव कर राज्यसभा में पेश किया जाए. ग़ौरतलब है कि बिल के ख़िलाफ़ आईएमए के तहत आने वाले तकरीबन साढ़े तीन लाख डॉक्टर हड़ताल पर हैं.
उधर डॉक्टरों का एसोसिएशन ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन’ (आईएमए) का कहना है, “बिल के अनुसार मेडिकल कॉलेजों के प्रबंधक 50 फीसदी से ज्यादा सीटों को अधिक दर पर बेच पाएंगे. इससे पढ़ाई महंगी हो जाएगी. इस बिल में मौजूदा धारा-32 के तहत करीब 3.5 लाख लोग जिन्होंने मेडिकल की पढ़ाई नहीं की है उन्हें भी लाइसेंस मिल जाएगा. इससे लोगों की जान को खतरा हो सकता है.”
देश भर में अलग-अलग हिस्सों में डॉक्टरों ने इस बिल को लेकर नाराज़गी जाहिर की है. केरल के त्रिवेंद्रम में भी मेडिकल छात्रों ने राजभवन के सामने नेशनल मेडिकल कमीशन बिल, 2019 को लेकर विरोध प्रदर्शन किया.
Kerala: Medical students protest against National Medical Commission Bill, 2019 in front of Raj Bhavan in Trivandrum. pic.twitter.com/nPCPjWhFCe
— ANI (@ANI) August 1, 2019
बता दें कि बिल पास होते ही पूरे देश के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए सिर्फ एक ही परीक्षा होगी. जिसका नाम नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) होगा.
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भी डॉक्टरों को मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए भी टेस्ट देना होगा. अगर वे इस परीक्षा को पास करते है तभी उन्हें मैडिकल प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस दिया जाएगा. इसी के आधार पर पोस्ट ग्रैजुएशन में एडमिशन किया जाएगा.
इसपर डॉक्टरों का कहना है कि यदि कोई छात्र किसी वजह से एक बार एग्जिट परीक्षा नहीं दे पाया तो उसके पास दूसरा विकल्प नहीं है क्योंकि, इस बिल में दूसरी परीक्षा देने का विकल्प ही नहीं है.