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तीन तलाक पर प्रगतिशील सोच रखने वाले प्रधानमंत्री को सबरीमला में आस्था की बात याद आ जाती है, जानें इन्टरव्यू में क्या कहा नरेंद्र मोदी ने

सबरीमला मंदिर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आस्था का विषय है.

एनआईए को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संप्रदाय के आधार पर भेदभावपूर्ण रवैया दिखाया है. उन्होंने तीन तलाक मुद्दे को महिलाओं के अधिकारों की समानता और सशक्तिकरण के लिए जरूरी बताया वहीं दूसरी ओर कहा कि सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा आस्था से जुड़ा विषय है.
इंटरव्यू के दौरान एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री महिलाओं को लेकर एक प्रगतिशील विचार रखते हैं, इसीलिए तीन तलाक कानून लाने पर उनकी सरकार का जोर है, लेकिन जब यही बात सबरीमला मंदिर का आता है तो उनकी पार्टी महिला अधिकारों के ख़िलाफ़ क्यों आ जाती है. इस पर प्रधानमंत्री ने गोलमोल जवाब दिया. उन्होंने कहा कि आप दो चीज़ों को एक करके देख रही हैं. दुनिया की कई इस्लामिक देशों ने तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाया है. इसलिए वह आस्था का मामला नहीं है. उन्होंने ट्रिपल तलाक को सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता से जोड़ा.
सबरीमला मंदिर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आस्था का विषय है. कई मंदिर ऐसे हैं जहां पुरुषों का प्रवेश वर्जित है. यहां प्रधानमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट की जज इंदु मल्होत्रा की राय का आड़ लेकर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक का बचाव किया.
बता दें कि बीते साल सितम्बर महीने में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने 4-1 के बहुमत से सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटा दिया था. इस बेंच में शामिल महिला न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा ने इस फ़ैसले से असहमति जताई थी. भारतीय जनता पार्टी इंदु मल्होत्रा के राय को आड़ बनाकर सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की बात करती है.
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