आधार को धन विधेयक बना कर मोदी सरकार ने संविधान के साथ धोखा किया – न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़
न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा आधार निजता के अधिकार का हनन करता है क्योंकि इससे संभवतः मतदाताओं एवं व्यक्तियों की प्रोफिलिंग हो सकती है।
सर्वोच्च न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की खंडपीठ अभी आधार कार्ड के संवैधानिक वैद्यता को लेकर दाखिल की गई याचिकाओं पर अपना फैसला सुना रही है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायाधीश ए के सिकरी, डी वाई चंद्रचूड़ एवं अशोक भूषण के इस खंडपीठ ने आधार को लेकर कुछ एहम फैसले अब तक ले लिए हैं।
इस दौरान एक तरफ जहां बाकी सभी न्यायाधीश आधार अधिनियम का धन विधेयक (मनी बिल) के रूप में पास होना स्वीकार कर लिया वहीं न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा की आधार अधिनियम को एक धन विधेयक के रूप में पारित करना संविधान में धोखाधड़ी है। उन्होंने कहा कि एक सामान्य विधेयक को धन विधेयक के रूप में पारित कर देना संविधान के साथ धोखा है।
Breaking: The passing #Aadhaar Act as money bill is fraud in the constitution: Chandrachud.J
— Live Law (@LiveLawIndia) September 26, 2018
उन्होंने यह भी कहा कि आधार निजता के अधिकार का हनन करता है क्योंकि इससे संभवतः मतदाताओं एवं व्यक्तियों की प्रोफिलिंग हो सकती है।
गौरतलब है की 2016 में आधार विधेयक को धन विधेयक के रूप में लोक सभा से पारित किया गया था।