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बैंकों को लोन देने के लिए रिजर्व बैंक पर दबाव बना रही है मोदी सरकार?

मोदी सरकार आरबीआई पर पीसीए नियमों में ढील देने के लिए एस. गुरुमूर्ति सहित बैंक के पार्ट टाइम निदेशकों के जरिए दबाव बना रही है.

मोदी सरकार भारतीय रिज़र्व बैंक पर उसके पीसीए नियमों (जिसके तहत आरबीआई ने 11 बैंकों को लोन देने में सख्ती बरती है) में छूट देने का दबाव बना रही है. इसके लिए एस. गुरुमूर्ति समेत बैंक के पार्ट टाइम निदेशकों के जरिए दबाव बनाया जा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस के सूत्रों के मुताबिक़, कुछ अनौपचारिक निदेशकों ने आरबीआई पर छोटे कंपनियों को ऋण देने संबंधी नियमों में छूट देने का दबाव बनाया है. मोदी सरकार द्वारा नियुक्त एस. गुरुमूर्ति समेत पार्ट-टाइम निदेशकों के एक धड़े ने यह मांग की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ‘सहकारी बैंक के सतीश मराठे, पूर्व भारतीय लेखा परीक्षक और लेखा सेवा अधिकारी रेवथी अय्यर और आरआईएस महानिदेशक सचिन चतुर्वेदी समेत सरकार द्वारा नियुक्त कुछ अन्य निदेशकों के आरबीआई के फुल-टाइम निदेशकों के साथ इन मामलों पर मतभेद हैं.’

आरबीआई के अधिकारियों का मानना है कि सरकार की यह मांग केंद्रीय बैंक के ‘सतत बैंकिंग’ के लिए एक माहौल तैयार करने के सीधे-सीधे ख़िलाफ़ जाती है.

रिज़र्व बैंक के पार्ट-टाइम अनौपचारिक निदेशकों की मानें तो उनकी यह मांग सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के मद्देनज़र की जा रही है, क्योंकि नोटबंदी की वज़ह से इन पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ा है. लेकिन, औपचारिक तौर पर मोदी सरकार ने कभी भी यह नहीं माना है कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, ख़ासकर लघु और मध्यम उद्योगों पर.

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