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भीड़ ने पीट-पीट कर ले ली थी मोहसिन की जान, अब मोदी सरकार की लापरवाही ने पिता को भी मार डाला

2014 में मॉब लिंचिंग के शिकार मोहसिन शेख़ के पिता साजिद शेख की जान ईलाज में कमी की वज़ह से चली गई.

महाराष्ट्र में मॉब लिंचिंग के शिकार मोहसिन शेख का परिवार केंद्र और राज्य सरकार की उदासीनता और लापरवाही का दंश झेल रहा है. इसका परिणाम यह हुआ कि मोहसिन के पिता साजिद शेख को पैसे की कमी की वज़ह से अपनी जान गंवानी पड़ गई. मोहसिन की मॉब लिंचिंग नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा एक अफ़वाह फैलने के बाद कर दी थी.

न्यूज़क्लिक की रिपोर्ट के मुताबिक साजिद के छोटे बेटे मुबिन शेख का कहना है कि पिछले दस दिनों से उनके पिता की तबीयत ठीक नहीं थी, पैसे की कमी की वज़ह से हमने उन्हें आयुर्वेदिक इलाज कराया. डॉक्टरों ने हमें सलाह दिया कि उनके हार्ट की बाइपास सर्जरी कराई जाए. इसके बाद हमने उन्हें अश्विनी हॉस्पीटल में भर्ती कराया जहां डॉक्टरों ने कहा कि ख़राब स्वास्थ्य की वज़ह से उनका ऑपरेशन करना सही नहीं है. ठीक हो जाने के बाद यह ऑपरेशन किया जाएगा. इसके बाद उन्हें आईसीयू से निकाल कर जनरल वार्ड में भर्ती कराया गया. सोमवार को हार्ट अटैक ने उनकी जान ले ली. पैसे की कमी की वज़ह से हम अपने पिता को नहीं बचा सके.

क्या था मामला

2 जून 2014 को सोशल मीडिया पर छत्रपति शिवाजी और बाल ठाकरे का अपमान करने संबंधी पोस्ट वायरल हो गया. इससे महाराष्ट्र में कई जगह झड़प हो गई. इस दौरान 28 वर्षीय मोहसिन शेख रात के सवा नौ बजे नमाज़ अदा करके लौट रहे थे, तभी बीच रास्ते में दक्षिणपंथी हिन्दू राष्ट्र सेना से जुड़े गुंडों ने पीट पीट कर उनकी हत्या कर दी. इस भीड़ को धनंजय देसाई नाम का शख़्स लीड कर रहा था. मोदी सरकार बनने के बाद यह मॉब लिंचिंग की यह पहली घटना थी.

मोहसिन की मौत बाद सरकार का रवैया कैसा रहा

मोहसिन शेख़ की मौत के बाद महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने परिवार को पांच लाख रुपए का मुआवज़ा दिया था. इसके अलावा परिवार को दंगा और सांप्रदायिक हिंसा कानून 2016 के तहत 5 लाख की मुआवज़ा राशि मिलनी थी, जिसे सरकार ने अभी तक नहीं दिया है.

इस मुकदमे को देख रहे वकील आफ़रीन ख़ान का कहना है कि मुआवज़ा राशि नहीं मिलने पर हमने पिछले साल मुंबई उच्च न्यायालय का रूख किया. इस साल अप्रैल महीने में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को जल्द से जल्द मुआवज़ा राशि पीड़ित परिवार को सौंपने का आदेश दिया. तब कोर्ट ने सरकार से अभी तक मुआवज़ा न दिए जाने का कारण भी पूछा था. इस पर सरकार का जवाब था कि उसे मोहसिन के पते की जानकारी नहीं थी, इसलिए यह मुआवज़ा राशि अभी तक नहीं दी जा सकी.

आफ़रीन ख़ान बताती हैं कि मोहसिन का परिवार हमेशा से शोलापुर में रहता है. और इससे पहले पृथ्वीराज चौहान ने इसी पते के आधार पर मुआवज़ा राशि दी थी. ऐसे में सरकार यह बहाना बिल्कुल फ़िज़ूल है. कोर्ट ने आदेश दिया कि एक हफ़्ते के भीतर पीड़ित परिवार को मुआवज़े की राशि दी जाए. बीते 5 दिसंबर को सरकार ने चेक के जरिए मुआवज़ा दिया, जिसे ईलाज में व्यस्त होने के कारण खुदरा नहीं करा सके.

मोहसिन की मॉब लिंचिंग केस में भी नहीं हुई कार्रवाई

मोहसिन शेख़ की मॉब लिंचिंग मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने चार्जशीट दायर की है. लेकिन अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं. 2014 में पुणे पुलिस ने 21 लोगों को गिरफ़्तार किया था. लेकिन, अब इस मामले के ज्यादा आरोपी जेल से बाहर निकल गए हैं. सिर्फ़ धनंजय देसाई यरवदा जेल में बंद है. इसी बीच इस मुकदमे को लड़ने वाले विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने इस केस को छोड़ दिया है, फिलहाल इस केस को सरकारी वकील उज्ज्वला पवार संभाल रही हैं.

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