मोदी राज में चरमराई अर्थव्यवस्था, 14 सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा देश में निवेश का आंकड़ा
निवेश की कमी के कारण उद्योग और रोजगार पर सीधा असर पड़ा है.
प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के बाद से देश के आर्थिक स्थिति की निराशाजनक तस्वीर सामने आई है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनोमी (सीएमआईई) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में निवेश और नई परियोजनाओं की घोषणा पिछले 14 सालों में सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है.
लाइव मिंट की ख़बर के मुताबिक सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर तक) में विभिन्न सरकारी व निजी कंपनियों ने एक लाख करोड़ रुपए की नई परियोजनाओं की घोषणा की थी, जो सितंबर तिमाही के मुकाबले 53 प्रतिशत और पिछले साल की इसी तिमाही से 55 प्रतिशत कम है.
निवेश व नई परियोजनाओं की घोषणा को लेकर निजी व सरकारी कंपनियों के हालात एक जैसे हैं. आंकड़ों के अनुसार निजी कंपनियों द्वारा दिसंबर तिमाही में नई परियोजनाओं की घोषणा में 62 प्रतिशत और सरकारी कंपनियों में 37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
ग़ौरतलब है कि कंपनियां फंड व पैसों की कमी की वजह से कई घोषित परियोजनाओं का काम पूरा नहीं कर पाई और उन्हें बीच में ही रोक दिया. जिसमें बिजली (पावर) और मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं. ऐसा इसलिए भी हुआ, क्योंकि जोखिम वाले कर्ज (एनपीए) को लेकर आरबीआई की सख्ती की वजह से बैंक नया लोन देने में सावधानी बरत रहे हैं.
नई परियोजनाओं और निवेश में कमी का सीधा और व्यापक असर रोजगार के नए अवसरों पर पड़ा है, क्योंकि उद्योग की गति धीमी होने की वजह से कंपनियां नए रोजगार के अवसर प्रदान नहीं करती हैं.