किसानों से किए मोदी सरकार के दावों का सच, धरातल पर फ़ेल हैं योजनाएं, देखे विडियो
कारवां ए मोहब्बत से बात करते हुए स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव और एलायंस फॉर सस्टेनेबल एंड हॉलिस्टिक एग्रीकल्चर (आशा) की संयोजक कविता कुरूगंती ने सरकारी योजनाओं की समीक्षा की है.
नरेंद्र मोदी की सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में किसानों के लिए क्या किया . किसानों से मोदी सरकार द्वारा किए गये वादे धरातल पर कितनी सफ़ल हो पायी हैं, इसका सच कारवां-ए-मोहब्बत यूट्यूब चैनल पर बताया गया है.
किसानों के लिए मोदी सरकार के दावों का सच स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एलायंस फॉर सस्टेनेबल एंड हॉलिस्टिक एग्रीकल्चर (आशा) की संयोजक कविता कुरूगंती ने बताया है.
कविता कुरूगंती ने कहा, “यह कहना ग़लत नहीं होगा कि 2014 के चुनाव में भाजपा कृषि समुदाय के लिए बहुत बड़े-बड़े वादे करके सत्ता में आयी थी. किसानों ने उन वादों पर भरोसा करके मोदी सरकार को वोट दिया.”
किसानों के लिए मोदी सरकार के वादे:
- साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी
- किसानों की लागत का डेढ़ गुना ज़्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य
- फसल बीमा योजना
साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी
स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र यादव का कहना है कि यदि मोदी सरकार किसानों की आमदनी 6 से 7 साल में दोगुना करना चाहती है, तो उन्होंने कोई लक्ष्य बनाया होगा कि इस योजना पर कैसे काम करना है. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं दिखा. 6 साल में किसानों की आय दोगुनी करने की बात तो कर दी. लेकिन 5 साल निकलने के बाद भी इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ.
कविता करूगंती ने कहा कि देश के किसानों से 2 लाख करोड़ रुपए लूटे जा रहे हैं. सच्चाई यह है कि भारतीय किसान वेतनभोगी वर्ग को सब्सिडी दे रहे हैं और हमलोग शहरी भारत में बैठे हैं.
किसानों की लागत का डेढ़ गुना ज़्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य
एमएसपी को लेकर कविता ने कहा है कि इस दिशा में काम करते हुए केंद्र सरकार ने अपनी पार्टी के राज्य सरकार और अन्य सरकारों को यह कहना शुरू कर दिया कि यदि आप केंद्र सरकार द्वारा घोषित किए गये एमसपी पर बोनस देते हैं, तो राज्य स्तर पर की जाने वाली सरकारी ख़रीद में हम केंद्र का समर्थन वापस ले लेंगे.” इसके बाद सरकार द्वारा जारी किए गए कीमतों को जब देखा गया तो यूपीए सरकार द्वारा दी जानी वाली कीमतों की तुलना में भी कम थी.
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर योगेन्द्र यादव ने कहा कि साल 2014 में मोदी जी ने कहा कि कांग्रेस ने स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों को लागू नहीं किया. बीजेपी सत्ता मे आएगी और किसानों की लागत का डेढ़ गुना ज्यादा समर्थन मूल्य देगी. लेकिन, इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दे दिया गया कि न्यूनतम समर्थम मूल्य लागू नहीं हो सकता.
वहीं, संसद में कृषि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने साल 2017 तक कहा कि हमने एमएसपी बढ़ाने का कोई वादा किया ही नहीं है. फिर, संपूर्ण लागत का डेढ़ गुना देने की बजाय आंशिक लागत का डेढ़ गुना किसानों को दे दिया गया, जो किसानों को पहले से ही मिल रहा था और इसे ही एमएसपी का नाम दे दिया गया. इसके बाद वित्त मंत्री अरूण जेटली ने मार्च 2018 में कहा कि हमने एमएसपी के वादे को पूरा कर दिया.
योगेन्द्र यादव और कविता दोनों का कहना है कि किसानों के साथ धोख़ाधड़ी की गयी है. हर स्तर पर किसानों के साथ जो वादा किया गया था, उसमें विश्वासघात हुआ है.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
फसल बीमा योजना पर स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने कहा कि इससे किसानों का कोई फायदा नहीं हुआ. किसानों से इज़ाजत लिये बगैर ही फसल का बीमा करा दिया गया और इसका कोई प्रमाण उन्हें नहीं दिया गया कि आपके फसल का बीमा किया गया है. यदि किसानों को बीमा का कोई प्रमाण (दस्तावेज़ के तौर पर) दिया जाता, तब वह बीमा की वसूली कर पाते. यानी कि यह योजना सिर्फ बोलने के लिए थी. धरातल पर इसका कोई फायदा नहीं हुआ.
इस मामले पर कविता का कहना है कि फसल बीमा योजना के तहत सरकार बीमा कंपनियों को प्रीमियम का बड़ा हिस्सा दे रही है. बीमा कंपनियों को भुगतान की गयी राशि और किसानों को मिली राशि की तुलना करें तो इसमें बीमा कंपनियों की जेब चमकती हुई दिखती है.