सच्चाई छुपाओ: मोदी नहीं चाहते कि आप जानें कि मनमोहन ने अर्थव्यवस्था उनसे बेहतर संभाली
यूपीए-2 के शासनकाल में 2010-11 में ऐतिहासिक 10.8 प्रतिशत दर्ज़ हुआ
मोदी सरकार ने मंगलवार को उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसके मुताबिक़ यूपीए के शासनकाल में भारत का सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) वर्त्तमान सरकार के मुकाबले कई गुना अधिक था।
रिपोर्ट के जांच-परिणाम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के प्रदर्शन पर लांछन साबित हो रहा है जिससे परेशान होकर सरकार ने यह कहा है कि “इस रिपोर्ट का कहीं भी हवाला न दिया जाए।”
द प्रिंट के अनुसार यह रिपोर्ट जिसमें पिछली श्रृंखलाओं की जीडीपी वृद्धि का विवरण था, उसे सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के वेबसाइट पर 25 जूलाई को प्रकाशित किया गया था। लेकिन मीडिया में काफी ध्यान आकर्षित करने की वजह से इस रिपोर्ट को उसके वास्तविक यूआरएल एड्रेस से हटाकर ‘ड्राफ्ट रिपोर्ट ऑन रियल सेक्टर स्टेटिस्टिक्स’ के नाम से ‘अबाउट अस’ के राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की श्रेणी में डाल दिया गया है।
इसके अलावा एक डिस्कलेमर (अस्वीकरण) भी पुर्वव्यापी रूप से रिपोर्ट में जोडा गया। ‘प्रारूप रिपोर्ट’ की भूमिका में लिखा है, “राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग द्वारा गठित समितियों ने सार्वजनिक परामर्श के लिए प्रारूप रिपोर्ट जमा की है। यह रिपोर्ट अंतिम नहीं है एवं इसके आंकड़े और अनुमान भी अंतिम नहीं हैं और इनका हवाला कहीं भी न दिया जाए। इस रिपोर्ट को राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग या एमओएसपीआई द्वारा मंज़ूरी नहीं दी गयी है”
रिपोर्ट के अनुसार भारत का जीडीपी वृद्धि दर भाजपा के शासनकाल के मुकाबले मनमोहन सिंह की सरकार में कहीं ज़्यादा था। यूपीए-1 के शासनकाल में 2007-08 में, जीडीपी दर 10.2 प्रतिशत दर्ज़ हुआ था जबकि यूपीए-2 के शासनकाल में 2010-11 में ऐतिहासिक 10.8 प्रतिशत दर्ज़ हुआ।
भाजपा सरकार के चार वर्षों के शासनकाल में भारत का उच्चतम जीडीपी 8.2 प्रतिशत था जो कि 2015-16 में दर्ज़ हुआ था जबकि 2017-18 में 6.7 प्रतिशत पर सबसे कम जीडीपी दर्ज़ हुआ।