मनरेगा श्रमिकों को महीनों से नहीं हुआ मजदूरी का भुगतान, पीएम मोदी के ख़िलाफ़ दर्ज करेंगे एफ़आईआर
एफ़आईआर बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक राज्यों के 150 पुलिस स्टेशनों पर दायर की जाएगी.
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत काम करने वाले मजदूरों ने देश के प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने का फ़ैसला लिया है. दरअसल, इस योजना के तहत कई राज्यों में काम करने वाले मजदूर कई महीनों से अपनी मजदूरी का इंतजार कर रहे है. लेकिन सरकार इस और ध्यान नहीं दे रही है.
न्यूज़क्लिक की ख़बर के अनुसार अक्टूबर 2018 से लेकर 1 फरवरी तक मनरेगा के लिए कोई धन आवंटित नहीं किया गया है. इसे लेकर बीते 28 फरवरी को नरेगा संघर्ष मोर्चा (एनएमएस) के द्वारा आयोजित ‘नेशनल डे ऑफ एक्शन’ में हज़ारों मनरेगा मजदूरों ने भाग लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी के लिए एफ़आईआर दर्ज करने का फ़ैसला किया है.
यह कहा गया कि एफ़आईआर बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक राज्यों के 150 पुलिस स्टेशनों पर दायर की जाएगी.
क्या है पूरा मामला
नरेगा संघर्ष मोर्चा (NSM) के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018-19 में जारी की गई 55,000 करोड़ी की राशि जनवरी 2019 में समाप्त हो गई है. इसके अलावा जो 6,084 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि जारी की गई उसमें से 5,745 करोड़ रुपये एमआईएस रिपोर्ट (R.7.1.1) पर प्रतिबिंबित आंकड़ों के मुताबिक़ लंबित देनदारियों को देने में समाप्त हो जाएंगी. इसलिए जो काम किया गया है और जो काम जून तक किया जाना है, उसका मजदूरी के रूप में भुगतान करने के लिए कोई फंड नहीं है.
मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों की क्या है मांग
1. हज़ारों श्रमिक जो जिन्हें काम के बदले पैसा नहीं मिला, उन्हें तुरंत भुगतान किया जाए.
2. केंद्र ने जनवरी से मार्च 2019 की अवधि में नए काम का सृजन करने के लिए कोई राशि जारी नहीं की है. भारत सरकार को तुरंत 25,000 करोड़ रुपये जारी करने चाहिए.
3.मोदी सरकार ने अपने 2019-2020 के बजट में इस योजना के लिए केवल 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे. लेकिन नरेगा संघर्ष मोर्चा की मांग है कि सरकार को इस योजना के लिए धनराशि बढ़ानी की ज़रूरत है. क्योंकि सरकार की अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि मनरेगा योजना के उचित कार्यान्वयन के लिए हर साल 88,000 करोड़ रुपये की राशि की आवश्यकता होगी.
आख़िर प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ एफ़आईआर ही क्यों
इसके जवाब में कामयानी कहते हैं कि कार्यकर्ता प्रधानमंत्री मोदी को काम कराने के लिए झूठे वादे करने, मजदूरों को वेतन में धोखा देने और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 के प्रावधानों की अवहेलना करने जैसे कई अपराधों के लिए दोषी मानते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि यह विडंबना है कि सरकार के पास बुलेट ट्रेनों और बैंकों को लूटने वाले कॉरपोरेट्स की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की भरपाई करने के लिए फंड है लेकिन श्रमिकों का भुगतान करने के लिए कोई पैसा नहीं है. श्रमिक अपनी मजदूरी और काम के उचित हिस्से का इंतजार कर रहे हैं.
कामायनी ने आगे कहा कि भारत सरकार मनरेगा के प्रावधानों को लागू करने के लिए उपयुक्त प्राधिकरण है. इसके प्रमुख के रूप में प्रधानमंत्री पिछले पांच सालों में बहुत कम धन आवंटित करने के लिए सीधे जिम्मेदार हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार श्रमिकों को समय पर भुगतान से वंचित करना, नरेगा श्रमिकों के लिए भूख और कठिनाई की वजह बनता है.
एनएसएम के बयान के अनुसार देश भर में हजारों श्रमिकों ने अपने लंबित वेतन की प्रतीक्षा करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 116 और 420 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का फ़ैसला किया है. और गलत काम करने वाले को तुरंत गिरफ़्तार करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है.