#Metoo मुहिम: इंडिया टुडे एंकर और कार्यकारी संपादक गौरव सावंत पर यौन उत्पीड़न का आरोप
‘द हिंदू’ अख़बार की पूर्व हेल्थ एडिटर विद्या कृष्णन ने लगाया गौरव सावंत पर यौन शोषण का आरोप
#Metoo मुहिम के ज़रिये कई महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के दर्द को साझा किया, जिनमें उत्पीड़न के आरोपों में नामी पत्रकारों, फिल्म जगत से जुड़े निर्देशकों, गायकों के नाम सामने आए हैं. इसी क्रम में इंडिया टुडे के कार्यकारी संपादक और टीवी एंकर गौरव सावंत का नाम भी शामिल हो गया है. ‘द हिंदू’ अख़बार की पूर्व हेल्थ एडिटर विद्या कृष्णन ने गौरव सावंत पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया है. विद्या ने गौरव पर ग़लत तरीक़े से छूने की कोशिश की और उनके कमरे में ज़बरदस्ती घूसकर बदसलूकी करने का आरोप लगाया है.
द वायर की रिपोर्ट के अनुसार यह घटना 15 साल पुरानी है. 2003 में विद्या ने ‘द पॉयनियर’ अख़बार को जॉइन किया था. विद्या कृष्णन ने बताया कि बहुत साल पहले वह पंजाब के ब्यास शहर में भारतीय सेना के आयोजित कार्यक्रम को कवर करने गई थीं. उनके साथ गौरव सावंत भी मौजूद थे. विद्या का दिल्ली से बाहर यह पहला असाइनमेंट था. पत्रकारों की गाड़ी में सावंत उनके पीछे बैठे थे. अचानक सावंत ने अपना दाहिना हाथ विद्या की छाती पर रख दिया. उस समय विद्या न कोई प्रतिक्रिया दे पाई और न ही इस विषय में किसी को बता पाईं.
विद्या ने आगे बताया कि सावंत का यह व्यवहार यही नहीं रूका और गौरव सावंत ने उन्हें एक मैसेज भेजकर अपने कमरे में बुलाया और मैसेज में लिखा की वह उनके साथ बाथटब में जाना चाहते हैं. लेकिन विद्या ने इनकार कर दिया. कुछ देर बाद गौरव उनके कमरे में बिना इजाज़त के आए और उनके साथ बदसलूकी करने लगे. विद्या ने बताया कि सांवत ने अपने पैंट की ज़िप खोली और उन पर अपना निज़ी अंग छूने का दवाब बनाने लगे. विद्या सांवत को धक्का दे पाने में असमर्थ हुई तो उन्होंने चिल्लाना शुरू कर दिया. विद्या ने बताया,‘मुझे लगता है उस समय उनके दिमाग में विचार आया होगा कि वह मेरा बलात्कार नहीं कर सकते. इसलिए वह उस समय वहां से चले गए.’
हालांकि इस हादसे के बाद विद्या ने अख़बार के प्रबंधन से शिकायत नहीं की और न ही अख़बार के संपादक और पूर्व राज्यसभा सांसद चंदन मित्रा से संपर्क किया. विद्या ने बताया कि उस समय उन्हें द पॉयनियर में कोई आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) होने की जानकारी नहीं थी. वहीं दूसरी ओर अख़बार के संपादक चंदन मित्रा का कहना है कि द पॉयनियर में यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट करने के लिए समिति बहुत पहले बन गई थी. लेकिन 2003 में समिति थी या नहीं यह बात उन्हें याद नहीं है.
विद्या का कहना है कि, ‘सांवत का नाम न लेने के पीछे सिर्फ पेशेवर मजबूरी नहीं थी बल्कि सामाजिक मजबूरियां भी शामिल थी.’ विद्या ने कहा, ‘महिलाओं के प्रति ऐसा व्यवहार न्यूज़ रूम कल्चर में आम बात हो चुकी है. हमारे साथ बहुत प्रतिभाशाली महिला रिपोर्टर होती है. लेकिन वह आगे नहीं बढ़ पाती क्योंकि उन्हें वस्तु की तरह देखा जाता है.’
हालांकि गौरव सावंत ने विद्या द्वारा अपने ऊपर लगे आरोपों को ख़ारिज करते हुए ट्वीट किया, “द कैरावैन में प्रकाशित लेख गैर ज़िम्मेदार, आधारहीन और पूरी तरह से झूठ है.” उन्होंने आगे लिखा, “मैं अपने वकीलों से बात कर रहा हूं और इस पर कानूनी कदम उठाऊंगा. मेरा सहयोग करने के लिए मेरे परिवार, दोस्तों और दर्शकों का आभारी हूं.”
The article published by Caravan is irresponsible, baseless, and completely false. I am talking to my lawyers and will take full legal action. So grateful to my family, friends, and viewers for their support.
— GAURAV C SAWANT (@gauravcsawant) 12 November 2018
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले में इंडिया टुडे ने कहा, ‘दुर्भाग्य से हम इस मामले पर किसी प्रकार की कोई टिप्पणी नहीं कर सकते और न ही इसकी जांच कर सकते हैं, क्योंकि 2003 में गौरव सावंत हमारे साथ काम नहीं करते थे.’