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न्याय के कठघरे में ‘धर्मनिरपेक्षता’ का मज़ाक, जज ने कहा – भारत को होना था हिन्दू राष्ट्र

न्यायमूर्ति सेन ने कहा कि पड़ोसी देशों से आने वाले गैर-मुस्लिम लोगों को भारत में बसने की इजाज़त हो.

मेघालय उच्च न्यायालय ने बीते 10 दिसंबर को सेना भर्ती के लिए निवास प्रमाण पत्र के संबंध में सुनवाई के दौरान एक सांप्रदायिक बयान दिया है. न्यायमूर्ति ने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र होना चाहिए और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को यह सुनिश्चित करने की अपील की कि भारत कहीं इस्लामिक देश न बन जाए.

न्यायमूर्ति एस आर सेन ने सरकार से अनुरोध किया कि वह पड़ोसी देशों से आकर बसे हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई, खासी जयंतिया और गारो समुदाय के लोगों को बिना किसी दस्तावेज के भारतीय नागरिक घोषित करें. उन्होंने यह भी कहा कि वह भारत में बसे शांतिप्रिय मुसलमानों के ख़िलाफ़ नहीं हैं. न्यायमूर्ति सेन ने कहा, “मैं अपने उन मुसलमान भाइयों और बहनों के ख़िलाफ़ नहीं हूं जो भारत में कई पीढ़ियों से रह रहे हैं और यहां के कानून का पालन करते हैं. उन्हें यहां शांति से रहने दिया जाना चाहिए.”

ज़ी न्यूज़ की ख़बर के अनुसार उन्होंने केंद्र सरकार से ऐसा कानून बनाने की अपील की है जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों में रहने वाले गैर-मुस्लिम समुदाय को भारत आकर बसने की इजाज़त हो. न्यायामूर्ति सेन ने कहा, “मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि कोई भारत को इस्लामिक देश बनाने की कोशिश न करे. यदि यह देश इस्लामिक बन गया तो भारत और दुनिया में कयामत आ जाएगी. मुझे पूरा यकिन है कि मोदी जी की सरकार मामले की गंभीरता को समझेगी और ज़रूरी कदम उठाएगी. हमारी मुख्यमंत्री ममता जी राष्ट्रहित में उसका समर्थन करेंगी.”

उन्होंने कहा कि भारत को स्वतंत्रता के समय ही ‘हिंदू देश’ घोषित किया जाना चाहिए था. पाकिस्तान ने खुद को एक इस्लामी देश घोषित कर दिया था और भारत को भी धर्म के आधार पर विभाजित किया गया था. इसे हिंदू देश घोषित किया जाना चाहिए था. लेकिन भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में स्थापित हुआ.

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