मोदी सरकार ने सीजेआई गोगोई के अनुरोध पर रोका था जस्टिस वाल्मीकि मेहता का ट्रान्सफ़र- मार्कंडेय काटजू
काटजू ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट के जरिए बताया कि मुख्य न्यायाधीश गोगोई के कहने पर ही मोदी सरकार ने न्यायमूर्ति वाल्मिकी मेहता का तबादला रोका था.
पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने भारत के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई पर गंभीर आरोप लगाए हैं. काटजू ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट के जरिए बताया कि मुख्य न्यायाधीश गोगोई के कहने पर ही मोदी सरकार ने न्यायमूर्ति वाल्मिकी मेहता का तबादला रोका था.
पोस्ट में काटजू ने न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेहता के दिल्ली उच्च न्यायालय से ‘नॉन-ट्रान्सफर’ के बारे में लिखा है कि “न्यायमूर्ति मेहता भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के रिश्तेदार हैं. नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की भाजपा सरकार ने गोगोई के अनुरोध के बाद न्यायमूर्ति मेहता का तबादला रुकवा दिया था”
गौरतलब है कि मार्च, 2016 में मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की नेतृत्व वाली कॉलेजियम ने जस्टिस मेहता का तबादला दिल्ली उच्च न्यायालय से बाहर करने की सिफारश की थी. लेकिन, सरकार ने इस सिफारिश को नहीं माना. उस दौरान यह भी सुर्ख़ियों में था कि न्यायाधीश ठाकुर ने न्यायाधीश मेहता से न्यायिक कार्य वापस ले लेने की चेतावनी भी दी थी. लेकिन न्यायाधीश ठाकुर के सेवानिवृत होने के बाद सरकार ने जस्टिस मेहता की फाइल नए मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर के नेतृत्व वाली कॉलेजियम को वापस भेजी. इसके बाद, बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक़, जुलाई, 2017 को न्यायाधीश कहर ने जस्टिस मेहता को दिल्ली उच्च न्यायालय से बाहर स्थानांतरित करने पर पुनर्विचार करने की बात को मान लिया.
इस पूरे घटनाक्रम का हवाला देते हुए काटजू ने लिखा, “जनवरी, 2017 में जस्टिस ठाकुर के सेवानिवृति के बाद ही सरकार ने फाइल नए सीजेआई खेहर को वापस भेजी, जिनके कॉलेजियम ने उनके तबादले की सिफारिश को वापस ले लिया.”
काटजू ने कहा कि सीजेआई गोगोई की बेटी की शादी जस्टिस मेहता के बेटे से हुई है. उन्होंने आगे कहा, “यह एक रहस्य है, लेकिन जो अफवाह मैंने सुनी है (और यह सिर्फ एक अफवाह है जो कि सच हो भी सकता है और नहीं भी) वह यह है कि तत्कालीन सीजेआई ठाकुर के कॉलेजियम द्वारा जस्टिस वाल्मीकि के स्थानांतरण की सिफारिश के बाद उनके ‘सम्बन्धी’, जस्टिस गोगोई प्रधानमंत्री मोदी (या कोई अन्य वरिष्ठ नेता) के पास गए और जस्टिस महता का तबादला नहीं करने का अनुरोध किया.”
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गौरतलब है कि हाल ही में अलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटा देने को लेकर और 32 जजों को पीछे छोड़कर जस्टिस महेश्वरी और जस्टिस खन्ना को सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम में नियुक्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को भीषण आलोचना झेलनी पड़ रही है. जस्टिस महेश्वरी और जस्टिस खन्ना को कॉलेजियम में नियुक्त करने के क़दम की बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया और पूर्व जजों ने कड़ी निंदा की है.