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मराठी साहित्य महोत्सव: लेखिका नयनतारा सहगल से निमंत्रण वापस लेने पर बोले गडकरी- नेताओं को अपने काम से रखना चाहिए काम

नितिन गडकरी ने कहा कि राजनेताओं की अपनी एक सीमा होती है और हमें साहित्य और शिक्षा जैसे विषयों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

मराठी साहित्य महोत्सव से सुप्रसिद्ध लेखिका नयनतारा सहगल का निमंत्रण वापस लेने पर मोदी सरकार के मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि नेताओं को अपना काम करना चाहिए और साहित्य जैसे दूसरे क्षेत्रों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

यवतमाल में सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि राजनेताओं की अपनी एक सीमा होती है और हमें साहित्य और शिक्षा जैसे विषयों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. उस क्षेत्र से जुड़े लोगों को उनका काम करने देना चाहिए.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक गडकरी ने कहा, “हस्तक्षेप नहीं करने का मतलब यह नहीं है कि हम लेखकों के साथ अपना संबंध नहीं रखें. आपातकाल के दौर में दुर्गा भागवत और पी.एल देशपांडे जैसे लेखक काफ़ी चर्चित हुए थे. लोग नेताओं से ज्यादा उनकी बातों को सुनना पसंद करते थे. साहित्य में रहते हुए भी उन्होंने लोकतंत्र की लड़ाई लड़ी थी… राजनीति और साहित्य से जुड़े लोगों के बीच संचार होना चाहिए. संचार नहीं होने से बुरा संचार होता है और बुरे संचार के कारण दोनों पक्षों में तल्खी होती है. इसलिए हमें एक-दूसरे की सीमाओं को पहचानना चाहिए और सम्मान करना चाहिए.

बता दें कि महोत्सव में अंग्रेजी की लेखिका नयनतारा सहगल को आयोजकों ने आमंत्रित किया था. लेकिन, मनसे कार्यकर्ताओं के हंगामे के बाद उनका आमंत्रण रद्द कर दिया गया. हालांकि राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी के लोग इस विरोध-प्रदर्शन में शामिल नहीं थे. ऐसे में माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े संगठनों के दबाव में नयनतारा सहगल का कार्यक्रम रद्द किया गया. नयनतारा सहगल मोदी सरकार में असहिष्णुता के मुद्दे पर साहित्य अकादमी अवार्ड लौटा चुकी हैं.

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