फ़र्ज़ी डिग्री विवाद: महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति अरविन्द अग्रवाल का इस्तीफ़ा!
कुलपति अरविंद अग्रवाल ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी लेकिन, कुलपति बनने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ों में उन्होंने जर्मनी की यूनिवर्सिटी का नाम दे दिया था.
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी के कुलपति अरविंद अग्रवाल को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा है. उनपर कुलपति बनने के लिए डिग्री में फ़र्ज़ीवाड़ा करने के कथित आरोप लगे थे.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कुलपति अग्रवाल ने 26 अक्टूबर को ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया था. हालांकि, उन्होंने मंत्रालय से अनुरोध किया है कि उन्हें नवंबर के मध्य तक इस पद पर बने रहने दिया जाए.
क्या है डिग्री फ़र्ज़ीवाड़ा का मामला-
ग़ौरतलब है कुलपति अरविंद अग्रवाल ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी लेकिन, कुलपति बनने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ों में उन्होंने जर्मनी की यूनिवर्सिटी का नाम दे दिया था. यहां के छात्र और शिक्षक पिछले डेढ़ साल से विश्वविद्यालय में फैली अनियमितताओं को लेकर कुलपति के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रहे थे. हाल ही में जब एक आरटीआई से यह खुलासा हुआ कि वे फ़र्ज़ी सर्टिफिकेट लगाकर कुलपति बने हैं तो मामला और गरम हो गया. विरोध प्रदर्शन और भी तेज़ हो गए.
क्या कह रहे हैं कुलपति-
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कुलपति ने पद छोड़ने वाली बात से इंनकार किया है. उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने अकादमिक रिकॉर्ड के फ़र्ज़ीवाड़े के आरोपों को लेकर मेरी प्रतिक्रिया मांगी है, जिसे मैं दो महीने पहले ही दे दिया था.
कई विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के संबंध में हो रही जांच-
मोतिहारी का यह केंद्रीय विश्वविद्यालय पहला विश्वविद्यालय नहीं है, जिसमें अनियमितता की बात सामने आई है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने की बाद से विश्व भारती विश्वविद्यालय, पॉन्डिचेरी विश्वविद्यालय, हेमवतीनंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, त्रिपुरा विश्वविद्यालय और इग्नू के कुलपति के ख़िलाफ़ भी जांच शुरू की गई है. किसी पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है तो कोई एकेडमिक में फ़ेल हैं.
पिछले काफ़ी समय से चर्चा में रहा मोतिहारी का यह केंद्रीय विश्वविद्यालय-
आपको बता दें कि पिछले काफ़ी समय से इस विश्वविद्यालय के छात्र-शिक्षक कुव्यवस्थाओं के ख़िलाफ़ साझा संघर्ष कर रहे हैं. एक महीना पहले ही विश्वविद्यालय के एक बहुजन समुदाय से आने वाले प्रोफेसर संजय कुमार पर भीड़ द्वारा बर्बर हमला किया गया था. उस हादसे से उक्त शिक्षक अब भी उबर नहीं पाए हैं. संजय कुमार ने आरोप लगाया था कि उनपर यह हमला कुलपति के गुंडों द्वारा सुनियोजित ढंग से किया गया था.