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मध्यप्रदेश: मच्छरदानी वितरण के लिए लाखों रुपए खर्च कर चुका मलेरिया विभाग लेकिन पांच सालों से लोगों को नहीं मिली मच्छरदानी

मध्यप्रदेश के कई ज़िले देश में ही नहीं बल्कि विश्व में मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में सबसे हाई रिस्क ज़ोन में

शिवराज सरकार में मध्यप्रदेश के कई ज़िले देश में ही नहीं बल्कि विश्व में मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में सर्वोच्च स्थान पाते रहे हैं। 2016 में ही सूबे का मंडला ज़िला पूरी दुनिया में मलेरिया प्रभावित इलाकों में नंबर एक पर था। सरकार ने इसके रोकथाम के लिए पायलट प्रोजेक्ट की योजना तैयार की थी। लेकिन जब सूबे में मलेरिया के रोकथाम के लिए बुनियादी सुविधाओं का ही अभाव हो तो अलग-अलग प्रोजेक्ट और योजना चलाने से क्या हो जाएगा।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के उमरिया ज़िले में पिछले पांच सालों से मेडिकेटेड मच्छरदानी नहीं बाटी गई है और न ही मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में दवाई का छिड़काव हुआ है। ज़िले के ग्रामीण इलाकों में सैकड़ों लोग मलेरिया के चपेट में आकर बिस्तर पर हैं।

ईनाडु की एक रिपोर्ट के अनुसार उमरिया ज़िले में कुल 660 गांव में से 65 गांव हाई रिस्क ज़ोन वाले हैं जहां मलेरिया का खतरा सबसे ज़्यादा है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ऐसी लापरवाही कर रही है कि यहां पांच सालों से मेडिकेटेड मच्छरदानी ही वितरित नहीं की गई हैं। गांव में मच्छरों का प्रकोप भयानक है लेकिन यहां दवाई का छिड़काव भी नहीं किया गया है।

आपको बता दें कि मध्यप्रदेश का मलेरिया विभाग मच्छरदानी बांटने को लेकर लाखों रुपए सर्वे में खर्च करता है। इस साल ही विभाग ने तकरीबन 2 लाख 29 हजार मच्छरदानी ग्रामीणों के बीच वितरित करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन लाखों रुपए खर्च करके भी मच्छरदानी क्यों उपलब्ध नहीं करवा पायी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। अधिकारी खुद को नया बताकर मामले से अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।

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