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शिवराज सरकार के सख्त रवैये ने जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल को और बनाया पेंचीदा 

24 डॉक्टरों के निष्कासन के बाद 21 डॉक्टरों के पंजीयन रद्द करने की चल रही है तैयारी

शिवराज सरकार में डॉक्टरों के चल रहे हड़ताल का कोई समाधान नज़र नहीं आ रहा है। जूनियर डॉक्टरों के प्रति सरकार के सख्त रवैए ने मामले को और पेंचीदा बना दिया है। मामला सुलझने के बजाय और बिगड़ रहा है।

नई दुनिया की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार हड़ताल खत्म कर काम पर वापस नहीं आने पर 24 डाक्टरों के निष्कासन के बाद अब 21 जूनियर डॉक्टरों के पंजीयन रद्द करने की तैयारी में है। इसके लिए मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल को पत्र लिखा गया है। काउंसिल के तरफ से डॉक्टरों के पंजीयन हफ्तेभर के लिए निरस्त करने के आदेश ज़ारी हो सकते है।

इसके साथ ही हड़ताली नर्सेस पदाधिकारियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के लिए नर्सिंग काउंसिल को निर्देश दिए गए हैं। पीजी फर्स्ट ईयर वाले छात्रों को भी एसएमएस के द्वारा नोटिस भेज दिया गया है कि वे काम पर लौट आए नहीं तो उन्हें भी निष्कासित कर दिया जाएगा।

सरकार के इस कार्रवाई से जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जूडा) ने हड़ताल खत्म करने से मना कर दिया है। जूडा का कहना है कि 24 डॉक्टरों के निष्कासन के फ़ैसले को वापस लिया जाए।

आपको बता दें कि मध्यप्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर स्टायपेंड 20 हज़ार रुपए तक बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। इसके साथ ही स्वशासी कर्मचारी भी सातवें वेतनमान लागू करवाने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं।

इस बेमियादी हड़ताल से मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यस्था बिल्कुल ही चरमरा गई है। लोगों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। कई ऑपरेशन इसकी वजह से टाल दिए गए हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों का इलाज भी सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है।

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