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शिव ‘राज’ में धूम-धाम से मनाया गया आदिवासी दिवस, लेकिन योजनाओं के लाभ को तरस रहें आदिवासी

एक साल पहले शुरुआत की गई बैगा विकास सहायता योजना की राशि बैंक खाते में अब तक नहीं पहुंची

कल पूरी दुनिया में आदिवासी दिवस मनाया गया। मध्यप्रदेश में तो चुनावी मौसम को देखते हुए आदिवासी अधिकार की बात पहले से ही फिज़ा में घुल रही है। सूबे की भाजपा सरकार आदिवासी अधिकार यात्रा निकालकर खुद को आदिवासियों का सबसे बड़ा हितैषी साबित करने में लगी है। लेकिन इन दावों के बीच ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही है। मीडिया रिपोर्ट में पहले भी यह खुलासा हो चुका है कि आदिवासी अधिकारों की बात करने वाली इस सरकार में आदिवासियों की योजनाओं को लेकर उदासीनता अपने चरम पर है। इस साल ही आदिवासियों के बेहतरी के लिए आवंटित दो हज़ार करोड़ रुपए लैप्स हो गए। योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से इस सरकार से आदिवासी समाज खासा नराज़ है।

आदिवासी दिवस के दिन डिंडौरी ज़िले से एक मामला सामने आया। डिंडौरी के समनापुर विकासखंड के कंचनपुर गांव में करीब 80 बैगा आदिवासी परिवारों को आज भी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। एक साल पहले शुरुआत की गई बैगा विकास सहायता योजना की राशि उनके खाते में अब तक नहीं पहुंची है।

ईनाडु की एक रिपोर्ट के अनुसार एक साल पहले शुरू हुए इस योजना के तहत बैगा परिवार के लोगों को एक हज़ार रुपए मिलने का प्रावधान है। लेकिन ये राशि अब तक उन्हें एक भी बार नहीं मिली। मजबूरन बैगा आदिवासी नंगे पैर ही कलेक्टर के कार्यालय पहुंच गए और अपने हक की गुहार लगाई।

बैगा समुदाय की महिलाओं का कहना है कि इस राशि के नहीं मिलने से उन्हें बच्चों के भरण-पोषण में आर्थिक दिक्कतें आ रही हैं।

गौरतलब है कि बैगाओं ने आज भी अपने पुराने रीति-रिवाज़ों को संजोए रखा है जो डिंडोरी ज़िले की पहचान है। लेकिन साल-दर-साल नेता बदले, प्रशासनिक अमला बदला लेकिन आज भी बैगा आदिवासियों का हाल जस का तस है।

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