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मध्य प्रदेश में बच्चों की पढ़ाई को ताक पर रख कर हो रही है चुनाव की तैयारी

लगभग 80% शिक्षक लगा दिए गए चुनाव कार्यों में

शिवराज सिंह चौहान के शासन में चरमराये हुए शिक्षा व्यवस्था का एक और पहलु सामने आया है| आने वाले चुनाव की तैयारियों के लिए मध्य प्रदेश में शिक्षकों को चुनावी कार्यों में झोंक दिया गया है|

करीब 80 प्रतिशत शिक्षकों को बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) की ड्यूटी पर लगाया गया है जिसकी वजह से शिक्षक अपने स्कूलों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं| इसका सीधा प्रभाव उन स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों पर पड़ रहा है|

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के कुल 45,654 शिक्षकों में से 41,340 शिक्षकों को 65,200 से ज़्यादा मतदान केन्द्रों में बतौर बीएलओ नियुक्त किया गया है|

इन आंकड़ों से अंदाज़ा लगता है कि किस तरह से शिक्षा व्यवस्था के साथ मनमानी की जा रही है| इसी रिपोर्ट में एक सरकारी स्कूल का ज़िक्र किया गया जिसमें अभी सिर्फ दो शिक्षक ही हैं जो स्कूल के अलग-अलग श्रेणियों के विद्यार्थियों को एक ही कक्षा में बैठा कर पढ़ाने पर मजबूर हैं|

इस वजह से विद्यार्थियों के शिक्षा का स्तर गिर रहा है जिसका असर उनकी वार्षिक परीक्षाओं में सीधे-सीधे दिखाई देगा| शिक्षकों की भी इस वजह से हालत खराब है क्योंकि उन्हें एक-एक बाद एक सभी कक्षाओं को पढ़ाना पड़ रहा है| ऐसे ही अन्य सरकारी स्कूलों की अवस्था भी अत्यंत खराब है|

गौरतलब है कि 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया था कि शिक्षकों से उनके स्कूलों में कक्षाएं छुडवाकर गैर-शैक्षिक कार्य नहीं करवाया जा सकता है| लकिन इस आदेश के बावजूद यह मनमानी अब तक जारी है|

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