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मध्यप्रदेश: प्रस्तावित बांध के कारण लोगों को सता रही भविष्य की चिंता, समझ नहीं आ रहा कि जाए तो जाए कहां

बांध में रोके गए पानी से आठ गांव पानी में विलीन हो जाएंगे, 15,000 लोगों की जिंदगियां अस्त-व्यस्त हो जाएंगी।

शिवराज सरकार में बांध तो बन जाते हैं लेकिन बांध निर्माण के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों को उचित मुआवज़ा नहीं मिल पाता है। डूब क्षेत्र के लोग वर्षों इंतज़ार करते हैं या पुनर्वास की व्यवस्था की मांग को लेकर आंदोलन करने को मजबूर होते हैं।

ताज़ा मामले में मध्यप्रदेश के रतलाम ज़िले में बांध बनने से कई गांववालों की रातों की नींद उड़ गई है। ग्रामीण दिन-रात इसी चिंता में डूबे रहते हैं कि बांध के बन जाने के बाद आख़िर वे कहां जाएंगे।

गौरतलब है कि हिंद किसान की एक रिपोर्ट के अनुसार रतलाम ज़िले से निकलने वाली करण नदी पर मध्यप्रदेश सरकार 250 करोड़ की लागत से बांध बनाने वाली है। इस प्रोजेक्ट को लेकर अशंका जताई जा रही है कि जहां एक तरफ बांध के बन जाने से 7000 हेक्टेयर में सिंचाई की उपलब्धता हो जाएगी, वहीं दूसरी तरफ बांध में रोके गए पानी से आठ गांव पानी में विलीन हो जाएंगे। इससे 15,000 लोगों की ज़िंदगी अस्त-व्यस्त हो जाएगी।

प्रस्तावित बांध का आलम ये है कि इसके कारण पहले से प्रस्तावित कई शादियां टूट गई। दूसरे गांव के लोग इस गांव में अपनी लड़की की शादी नहीं करना चाह रहे हैं। लोगों का कहना है कि कोई अपनी बेटी की शादी डूब क्षेत्र वाले इलाके में क्यों करें।

लोगों की परेशानी काफ़ी बढ़ गई है। सरकारी मुआवज़ा इतना कम मिला है कि वे कहीं जमीन खरीदने में असमर्थ है। आस-पास खेती लायक ज़मीन नहीं है और मालवा क्षेत्र में ज़मीन बहुत महंगी है। जहां उन्हें मुआवज़े के रूप में एक बीघा का महज़ एक लाख रुपया मिला है,वहीं मालवा में एक बीघे ज़मीन की कीमत 10 लाख है। ग्रामीणों का कहना कि आख़िर वो करे तो क्या करें। उनका कोई सुनने वाला नहीं है। प्रशासन ने सारे मामले से अपना मुंह फेर दिया है।

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