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सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र में मौत की पुल, स्कूल जाते बच्चे होते हैं इसके शिकार

मध्यप्रदेश के रायसेन ज़िले के संतूक गांव में बच्चों को स्कूल जाने के लिए मौत की पुल को पार करना पड़ता है।

कुछ दिन पहले ही सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र रायसेन में सड़क के बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने काफ़ी आक्रोश जताया था। सड़क पर ही धान रोपनी कर प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकृष्ट करना चाहा था। लेकिन विरोध के नए तरीकों से भी स्थानीय प्रशासन, विधायक और सांसद को कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है।

सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र में एक और मामला सामने आया है। रायसेन ज़िले के संतूक गांव में बच्चों व लोगों को गांव से बाहर निकलने के लिए मौत की पुल को पार करना पड़ता है।

हिंद किसान की एक रिपोर्ट के अनुसार इस गांव से बाहर निकलने के लिए एक नदी को पार करना पड़ता है। प्रशासन के तरफ से आज तक नदी पार करने के लिए कोई पुल नहीं बनाया गया। गौरतलब है कि ये गांव सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र में आता है।

प्रशासन द्वारा पुल नहीं बनाने पर लोगों ने ख़ुद से ही एक बांस का अस्थाई पुल बनाया है, जो बहुत ही खतरनाक है। थोड़ी सी चूक से जान जा सकती है या गंभीर चोट लग सकती है। कई बार बच्चे स्कूल जाते वक्त पुल पार करने के दौरान नदी में गिर जाते हैं। कई बच्चों ने स्कूल जाना इसी वज़ह से छोड़ दिया है।

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