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मध्य प्रदेश: 9 अगस्त को दलित समूहों द्वारा घोषित बंद एवं आंदोलन को रोकने की पुरज़ोर कोशिश में प्रशासन

भिंड, मुरैना और ग्वालियर सहित कई ज़िले बने पुलिस छावनी, जगह-जगह लागू कर दी गयी धारा 144

पूरे देश में 9 अगस्त को प्रस्तावित भारत बंद आंदोलन को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड में दिखा। पिछली बार भारत बंद का सबसे ज़्यादा असर मध्यप्रदेश के भिंड, मुरैना और ग्वालियर सहित कुछ इलाकों में पड़ा था, इसलिए इस बार प्रशासन ने इन ज़िलों को पुलिस छावनी में तबदील कर रखा था। हिंसा के दोहराव को रोकने के लिए प्रशासन के द्वारा किसी ज़िले में एक दिन तो कहीं दो दिन तक धारा 144 लागू कर दी गई है।

ईनाडु इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भिंड ज़िले में किसी भी तरह के जुलूस, प्रदर्शन या सभा पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। प्रशासन ने पुलिस के साथ-साथ रैपिड एक्शन फ़ोर्स भी तैनात किया है। यूं तो बंद को लेकर अभी तक किसी भी संगठन ने कोई ज़िम्मेदारी नहीं ली है परन्तु प्रशासन और पुलिस किसी भी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहती। मुरैना में तो 144 धारा आज और कल दोनों दिन लागू रहेगी।

ज्ञात हो कि एससी एसटी एक्ट पर सर्वोच्च न्यायलय के एक आदेश के बाद दलित समूहों ने बीते 2 अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया था और बड़ी तादाद में देश में के अलग अलग हिस्सों में सड़कों पर उतर आये थे। इसी बीच हुए हिंसा एवं उसके बाद सैंकड़ों दलित नौजवानों एवं नेताओं पर शासन-प्रशासन द्वारा लगाये गए झूठे प्रकरणों के खिलाफ दलित समुदायों ने एक बार फिर 9 अगस्त के आन्दोलन का ऐलान किया।

हालांकि केंद्र में मोदी सरकार ने इस मामले में चुनावों के मद्देनज़र एससी एसटी एक्ट के मूल प्रावधानों को फिर से बहाल करने की कोशिश ज़रूर शुरू कर दी है, लेकिन इससे अनुसूचित जाति-जनजाति समूह कुछ ज़्यादा आशान्वित नहीं लग रहे हैं।

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