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मध्य प्रदेश: एक ऐसा गांव जहां के लोग अपनी जान का जोख़िम उठाते हुए रस्सी पर चलकर पहुंचते हैं स्कूल और अस्पताल

20 फीट नाले के ऊपर लगी है ये रस्सी

रतलाम: रस्सी पर चलना कुछ लोगों के लिए एक साहसिक कार्य हो सकता है लेकिन भोपाल से 300 कि.मी. दूर रतलाम ज़िले के बजेड़ा गाँव के लोगों के लिए यह उनकी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का हिस्सा बन गया है।

बीते आठ वर्षों से इस गाँव के लोग एक नाले के ऊपर लगे रस्सी पर चलने पर मजबूर हैं जिसने उनके गाँव को उनके खेतों से अलग और एक पूरे परिवार को बाकी गाँव से अलग कर दिया है।

500 निवासियों का यह गाँव तब खबरों में आया जब आधी को एक 24-वर्षीय गर्भवती महिला, लाड कंवर को प्रसव पीड़ा में अस्पताल पहुँचने के लिए 50 फीट चौड़े और 20 फीट गहरे नाले को रस्सी पर चल कर पार करना पड़ा।

नाले पर पुल नहीं होने का सबसे ज़्यादा असर कँवर के 12 सदस्यों के परिवार पर पड़ा। इस परिवार ने अपना घर खेतों के पास वहाँ स्थित एक चेक डैम के निर्माण से पहले बनाया था। यह चेक डैम जो कि 2010 के करीब बना था, इसकी वजह से नाले में साल भर पानी से लबालब रहता है।

चेक डैम के निर्माण के बाद बाकी गाँव इस परिवार की पहुँच से दूर हो गया। जिस रात लाड ने रस्सी पर नाला पार किया था उसे याद करते हुए लाड के भाई ने कहा, “हमने टॉर्च का इस्तेमाल किया था उसे रास्ता दिखाना के लिए और उसके दूसरी तरफ सही सलामत पहुँचने तक हमारे साँसे अटकी रहीं।”

विकसित रणनीतियां: साड़ियाँ ऊंची पहनने, बच्चों को पीठ पर चढ़ाना

सुमेर सिंह के मुताबिक़ बीते सालों में उसके परिवार ने रस्सी, जो कि दोनों तरफ पेड़ों पेड़ों के टनों से बंधे हुए हैं, पर अपना संतुलन बनाये रखने के बहुत सारे तरीके सीख गए हैं। उन्होंने बताया, “औरतें अपनी साड़ियाँ ऊंचा पहनती हैं ताकि उन्हें नाला पार करने में आसानी हो और पुरुष बच्चों को अपने पीठ पर लादकर ले जाते हैं।”

सुमेर ने आगे बताया, “परिवार के 5 से 13 साल की उम्र के 6 बच्चों के लिए स्कूल जाना हर रोज़ किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। “या तो उन्होंने 5 कि.मी. लम्बे एक दूसरे रास्ते से चलकर जाना पड़ता है या फिर परिवार के किसी सदस्य पर निर्भर रहना पड़ता है जो उन्हें अपनी पीठ पर लादकर दूसरी तरफ ले जाए।”

यह रस्सी कई बार किसानों द्वारा भी इस्तेमाल की जाती है जो अपने खेतों पर जल्दी पहुंचना चाहते हैं। लेकिन यहाँ कई बार ऐसा हुआ जब लोग नाले में गिरने के बाद बाल-बाल बचे हैं। यह सब लोग क्यों अपनी जान जोखिम डाल रहे हैं जब एक वैकल्पिक रास्ता है? सुमेर के पास इसका जवाब है।

वैकल्पिक रास्ते का हश्र बहुत खराब

सुमेर ने बताया कि जो वैकल्पिक रास्ता है वह एक कच्ची सडक है जिसपे गाड़ियां नहीं चल सकती और बारिश के मौसम में यह रास्ता बिलकुल दलदला हो जाता है जिससे कि उस पर चलना मुश्किल हो जाता है। लाड, एक बेटे को जन्म देने के बाद, उसी रास्ते से चलकर वापस लौटी। उन्होंने कहा, “जब मैं इतनी पीड़ा में थी और जन्म देने वाली थी उस समय मेरे पास और कोई चारा नहीं था। क्या मैं उस हालत में 5 कि.मी. चल पाती?  नहीं।”

गाँव के और निवासी, बबलू ने कहा, “लगभग हर परिवार का नाले के दूसरी तरफ खेत है।” उन्होंने कहा कि खेती के औजार लेकर रस्सी पर चलना या 5 कि.मी. पैदल चलना दोनों ही किसानों के लिए बहुत मुश्किल है।

माला देवी, एक किसान, ने जोड़ते हुए कहा, “हम दूसरे रास्ते से जाते हैं जब खेती के औजार लेकर जाते हैं, लेकिन कभी-कभी हमने हलके औजारों को अपने पीठ पर बाँध कर नाले को पार किया है।”

प्रशासन का कहना, एक परिवार के लिए नहीं बना पाएंगे पुल

ज़िला प्रशासन इस गाँव के परिस्थिति से अवगत है लेकिन उनका कहना है कि चूंकि एक वैकल्पिक रास्ता है, इसलिए पुल की ज़रुरत नहीं है। रुचिका चौहान, रतलाम ज़िला कलेक्टर, ने कहा, “हम सिर्फ एक परिवार के लिए पुल नहीं बना सकते। हमने उन्हें सलाह दी है कि वो दुसरे रास्ते का इस्तेमाल करें। उनका एक घर गाँव में भी है लेकिन उन्होंने खेतों के पास कुछ सालों पहले रहना शुरू कर दिया। किसान जिनके खेत दूसरी तरफ हैं वे उस वैकल्पिक रास्ते का ही इस्तेमाल करते हैं। इस परिवार को भी यही करना चाहिए।”

चौहान ने बताया कि वहाँ के हालात का ब्यौरा लेने के लिए प्रशासनिक अधिकारीयों और दो इंजिनियरों की एक टीम अभी हाल ही में गयी थी। उन्होंने कहा, “टीम को पता चला कि जो वैकल्पिक रास्ता है वह सिर्फ 1.5 कि.मी ही दूर है नाले से और उसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

सुमेर ने कहा कि प्रशासन उस रास्ते की हालत को अनदेखा कर रहा है। उन्होंने कहा, “यहाँ सिर्फ हमारे परिवार को तकलीफों से नहीं गुज़ारना पड़ रहा है, गाँव से सभी किसानों को भी हर रोज़ अपने-अपने खेतों में आना पड़ता है। रोज़ 5 कि.मी. ऐसे खराब रास्ते पर चलना हमारे लिए बहुत ज़्यादा तकलीफदेह है लेकिन कोई भी इस बात को समझने के लिए तैयार नहीं है।”

(करिश्मा इंदौर की एक फ्रीलान्स लेखिका हैं और 101Reporters.comकी मेम्बर हैं जो कि पूरे देश में ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे पत्रकारों का नेटवर्क है)

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