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मोदी प्रधानमंत्री नहीं ‘प्रचार मंत्री’ हैं, अपने अहंकार के चलते छटपटा रहे हैं : राहुल गांधी

मोदी का निजी भ्रष्टाचार देश के समक्ष महत्वपूर्ण मुद्दा हैं.

लोकसभा चुनाव का प्रचार जोर पकड़ने के बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री की तुलना में कहीं अधिक एक ‘प्रचार मंत्री’ हैं और अपने अहंकार के चलते छटपटा रहे हैं.

राहुल ने कहा कि बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, नाकाम अर्थव्यवस्था और मोदी का निजी भ्रष्टाचार ही देश के समक्ष महत्वपूर्ण मुद्दे हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष ने पीटीआई भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि प्रधानमंत्री का व्यवहार ‘घबराहट’ का संकेत देता है. उन्होंने आरोप लगाया कि वह (मोदी) खुद के बखान के प्रति आत्ममुग्ध हैं.

लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद अपने प्रधानमंत्री बनने की संभावना के बारे में राहुल ने कहा, “इस मुद्दे पर टिप्पणी करना मेरे लिए अहंकार की बात होगी. जनता सर्वोपरि है और वही फैसला करेगी. मैं उन्हीं के लिए काम कर रहा हूं.”

प्रधानमंत्री पर पीएमओ के जरिए मीडिया में एक खास तरह के विमर्श को बल देने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मोदी असल मुद्दों से मुंह नहीं मोड़ सकते.

कांग्रेस अध्यक्ष ने मोदी पर 2014 के चुनावी वादों को पूरा नहीं करने और “नाकाम” अर्थव्यवस्था का संचालन करने का आरोप लगाते हुए कहा, “मोदी का अहंकार और सत्ता की उनकी भूख, खुद का बखान करने की उनकी यह झूठी मान्यता कि उनके पास भारत की हर समस्या का समाधान है और उन्हें किसी दूसरे से सलाह-मशविरा करने की जरूरत नहीं है, इन्हीं वजहों से वह छटपटा रहे हैं.”

उन्होंने कहा “संस्थाओं को नष्ट करना, घृणा एवं कट्टरपंथ का बढ़ना, समाज में रोष एवं हिंसा में प्रत्यक्ष बढ़ोतरी और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के अधिकारों पर हमला” जैसे कुछ अन्य मुद्दे हैं जिन पर मतदाता वोट देने से पहले विचार करेंगे.’’

उन्होंने कहा, “2014 में मोदी द्वारा प्रत्येक व्यक्ति के बैंक खाते में 15 लाख रुपये डालने का झूठा वादा, दो करोड़ नौकरियों के सृजन का वादा, 100 स्मार्ट शहरों बनाने और विदेश से 80 लाख करोड़ रुपया काला धन वापस लाने का वादा, यह सब चुनाव के मुख्य मुद्दे होंगे.”

यह पूछे जाने पर कि क्या वह भविष्य के प्रधानमंत्री हैं, राहुल ने कहा, ‘‘ऐसा कहना मेरे लिए अहंकारपूर्ण होगा. यह कहने वाला मैं कौन हूं? यह भारत के लोग हैं जो फैसला करेंगे….’’

पुलवामा हमले के बाद भाजपा के बढ़त हासिल करने की धारणा पर कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि फोन कॉल के जरिए मीडिया पर एक “खास तरह के विमर्श” को उठाने के लिए दबाव, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई की धमकियों के जरिए दबाव बनाया गया.

उन्होंने कहा, “मीडिया पर पीएमओ से निकलने वाले खास विमर्श को बढ़ावा देने का दबाव है. मीडिया में कुछ आवाजें हैं जो इस दबाव से लड़ रही हैं और मैं उनकी सराहना करता हूं.”

उन्होंने कहा, “लेकिन जमीन पर विमर्श स्पष्ट है कि नरेंद्र मोदी नौकरियों के संकट, कृषि संकट से निपटने में नाकाम रहे और भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया. यह विमर्श बदलने वाला नहीं है.”

राहुल ने कहा, “यह नहीं बदलने वाला, यह मूलभूत है, यह कहीं नहीं जा रहा. हम इन मुद्दों पर और न्याय योजना, शिक्षा में जीडीपी का कुछ हिस्सा लगाना और कृषि संकट के निपटारे से स्थापित किए गए सकारात्मक विमर्श पर यह चुनाव जीतने वाले हैं. ”

चुनावी फंडिंग पर राहुल ने कहा कि कांग्रेस पारदर्शिता का पूर्ण समर्थन करती है लेकिन चुनावी बॉन्ड पारदर्शिता के ठीक उलट हैं.

उन्होंने आरोप लगाया, “मोदी – एक ऐसा व्यक्ति जो भ्रष्टाचार से लड़ने के तख्त पर सवार होकर आया, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए सब कुछ किया और चुनावी बॉन्ड उसी का एक प्रमुख उदाहरण है.”

कांग्रेस के लिए इस बार के चुनाव कितने महत्त्वपूर्ण हैं, यह पूछे जाने पर गांधी ने कहा, “पिछला चुनाव कुछ अलग तरह का था. इस बार के चुनाव में जनता के सहयोग से हम अच्छा करेंगे.”

 

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