मोदी जैकेट का बाजार गिरा, हफ़्ते में मुश्किल से एक जैकेट बेच पा रहे हैं व्यापारी
2014 लोकसभा चुनाव के समय मोदी जैकेट की मांग काफी ज्यादा थी.
2014 के लोकसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री मोदी की जैकेट देशभर के बाजारों में काफी लोकप्रिय हो गई थी, लेकिन 2019 का चुनाव आते-आते इस लोकप्रियता में भारी गिरावट देखी गई है. कपड़ा विक्रेताओं का कहना है कि मोदी जैकेट की बिक्री में कमी आने लगी है, जबकि 2014 के चुनाव में इसकी मांग तेजी से बढ़ी थी.
जनसत्ता की ख़बर के अनुसार महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक स्थानीय कपड़ा विक्रेता ने कहा कि एक समय था जब हर रोज करीब 35 मोदी जैकेट की बिक्री हुआ करती थी, लेकिन अब एक हफ़्ते में एक ही जैकेट बिक पाती है. वहीं एक अन्य गुरविंदर सिंह नामक व्यापारी ने बताया कि जीएसटी, नोटबंदी और राज्य में सूखे की मार झेलने की वजह से दूसरे कपड़ों की तरह मोदी जैकेट की बिक्री पर प्रभाव पड़ा है.
ग़ौरतलब है कि गुलमंडी, तिलक पथ, औरंगपुरा, सर्राफा समेत कई क्षेत्र के कपड़ा व्यापारियों ने जैकेट की बिक्री में कमी को लेकर यहीं बातें दोहराई हैं.
कपड़ा व्यापारी राजेंद्र भावसर ने जनसत्ता से कहा कि पिछले एक साल में उन्होंने सिर्फ 10 मोदी जैकेट बेची हैं. उन्होंने कहा कि अब मुझे दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि जैकेट न बिकने की वजह से स्टॉक ज्यादा हो गया है. उन्होंने कहा कि मैंने काफी पैसा इसमें लगा दिया है, लेकिन कुछ फायदा नहीं हो रहा है.
स्थानीय दर्जी दिलीप लोखंडे ने कहा कि अब गर्मी आने वाली है. लोग खादी और सूती शर्ट खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं. अब कोई भी मोदी जैकेट सिलवाने के लिए हमारे पास नहीं आता है.
उन्होंने आगे कहा कि हमारे जिन कारीगरों को जैकेट बनाने थे, अब वे दूसरे फॉर्मल कपड़े सिलने लगे हैं. हम मोदी जैकेट की सिलाई के लिए 200 से 300 रुपए लेते थे, लेकिन अब हमारे कारीगर फॉर्मल ड्रेस सिलकर ज्यादा पैसे कमा रहे हैं.
बता दें कि बीते दिनों चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है. जिसके परिणाम आगामी 23 मई को सामने आएंगे.