सलाना 8 लाख के दायरे में 99% भारतीय आ जाएंगे,यह कोटा सबके लिए होकर भी किसी का नहीं है- अर्थशास्त्री कौशिक बसु
8 जनवरी को संसद ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी देते हुए संविधान विधेयक पारित कर दिया था.
विश्व बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने मोदी सरकार द्वारा सामान्य श्रेणी को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के कदम की आलोचना की है. उन्होंने इसके लाभ के लिए शर्तों की ख़ामियों पर ग़ौर करने को कहा है.
कौशिक बसु ने 10 जनवरी को ट्वीट करते हुए कहा कि आरक्षण की नई प्रणाली में सलाना 8 लाख से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के आवेदकों के लिए 10% नौकरियां हैं. लगभग 99% भारतीय घर इस श्रेणी में आते हैं. इस तरह के देखा जाए तो यह रिजर्वेशन देश के सभी लोगों के लिए लागू होता है. ऐसे में यह रिजर्वेशन किसी के लिए भी किसी काम का नहीं दिखता है.”
The new system of reservation holds 10% of jobs for applicants from households with annual income below Rs. 8 lakhs. Nearly 99% of Indian households fall in this category. So this is, effectively, a quota for all. But isn’t a quota for all, a quota for none?
— Kaushik Basu (@kaushikcbasu) January 10, 2019
बता दें कि मंगलवार 7 जनवरी को संसद ने संविधान में 124 वां संशोधन किया. जिसके बाद बुधवार, 8 जनवरी को संसद ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी देते हुए संविधान विधेयक पारित कर दिया.
वहीं कानूनी विशेषज्ञों ने कहना है कि यह एक विधयेक न्यायिक चुनौती के सामने टिक नहीं पाएगा क्योंकि भारतीय संविधान केवल आर्थिक आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है.