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भाजपा सांसद जायमांग जिस कारगिल में जश्न का माहौल बता रहे हैं, वहां की दुकानें बंद तो सड़कें सूनी

“हम केंद्र सरकार के उस फैसले का पुरजोर विरोध करते हैं जो बिना जम्मू-कश्मीर के लोगों की सहमति से लिया गया है. यह राज्य के लोगों के अंकाक्षाओं के ख़िलाफ़ है.”

लद्दाख से पहली बार सांसद चुनकर आए भाजपा के युवा नेता जायमांग सेरिंग नामग्याल का लोकसभा में दिया गया भाषण काफ़ी वायरल हो रहा है. उन्होंने अपने दिए भाषण में जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार के फैसले को काफ़ी सराहा है. उन्होंने यह भी कहा है कि लद्दाख के लोगों की मांग हमेशा से इस क्षेत्र को केंद्रशासित प्रदेश बनाने की रही है. लेकिन ज़मीनी सच्चाई उनके भाषणों से उलट है. मंगलवार को लद्दाख के कारगिल में सारे धार्मिक और राजनीतिक समूहों ने केंद्र सरकार के इस फैसले के विरूद्ध हड़ताल किया.

द वायर की एक ख़बर के अनुसार अनुच्छेद 370 हटाने और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने को लेकर सोमवार को कारगिल के धार्मिक और राजनीतिक समूहों ने आपसी विचार-विर्मश किया और मंगलवार को हड़ताल पर जाने का ऐलान किया.

जारी किए गए सामूहिक वक्तव्य में कहा गया, “हम केंद्र सरकार के उस फैसले का पुरजोर विरोध करते हैं जो बिना जम्मू-कश्मीर के लोगों की सहमति से लिया गया है. यह राज्य के लोगों के अंकाक्षाओं के ख़िलाफ़ है.”

बंद का असर भी कारगिल में काफ़ी दिखा. सोशल मीडिया पर कई तस्वीर दिखीं जिसमें सड़क सुना दिखा तो दुकानें भी बंद दिखीं.

https://twitter.com/asmitabee/status/1158667952150872065

दरअसल, केंद्र के इस फैसले से कारगिल केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख का एक भाग हो गया है, जिसकी अपनी कोई विधायिका नहीं होगी. हालांकि इस फैसले को लेकर लद्दाखी सांसद जायमांग लोकसभा से लेकर सोशल मीडिया तक कहते नज़र आ रहे हैं कि यह अवसर हमारे लोगों के लिए खुशी के अलावा और कुछ नहीं है.

प्रधानमंत्री मोदी सहित भाजपा के कई नेता जायमांग का लोकसभा में दिए गए भाषण का वाहवाही कर रहे हैं और इस लद्दाख के लोगों की आवाज़ बता रहे हैं.

सज्जाद हुसैन जो 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा नेता जायमांग से हार गए थे, पीटीआई को बताते हैं ,”लद्दाख के लोग हमेशा से चाहते हैं कि उन्हें जम्मू-कश्मीर से अलग कर दिया जाए पर वे अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के विरूद्ध हैं.” उन्होंने आगे कहा कि कारगिल के लोग देश की हमेशा से सुरक्षा करते  आए हैं, लेकिन यह फैसला हमारे इच्छा और आकांक्षाओं के ख़िलाफ़ है.”

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