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शर्मनाक: विचारों का गला घोंट रही मोदी सरकार, डीयू में नहीं पढ़ाई जाएगी दलित चिंतक कांचा इलैया की किताबें

दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने राजनीतिशास्त्र के पाठ्यक्रम से दलित चिंतक कांचा इलैया की किताबों को हिन्दुत्व विरोधी बता कर हटाने की सिफ़ारिश की है।

दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने राजनीतिशास्त्र के पाठ्यक्रम से दलित चिंतक और लेखक कांचा इलैया की पुस्तकों को हटाने की सिफ़ारिश की है। विश्वविद्यालय के अकादमिक मामले की स्टैंडिंग कमेटी का कहना है कि कांचा इलैया की पुस्तक हिन्दुत्व का अपमान करती है, इस कारण इसे विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ाया जा सकता। समिति ने विश्वविद्यालय के शैक्षिक लेखों में ‘दलित’ शब्द के प्रयोग को बंद करने की भी सिफारिश की है। फिलहाल यह सिफ़ारिश विश्वविद्यालय के शैक्षिक परिषद् को भेजी गई है, जिसकी मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक कमेटी के सदस्य प्रोफेसर हंसराज सुमन ने कहा है, ‘विश्वविद्यालय में मास्टर डिग्री के नौ कोर्सों के पाठ्यक्रम को लेकर चर्चा चल रही थी। इसमें हमने कांचा इलैया की पुस्तक ‘क्यों मैं हिंदू नहीं हूं’, ‘बफेलो नेशनलिज़्म’ और ‘पोस्ट-हिंदू इंडिया’ को हटाने का फैसला किया है क्योंकि इनमें हिन्दुत्व का अपमान किया गया है।’ उन्होंने ने कहा सिफ़ारिश को अकादमिक परिषद द्वारा मंजूरी देने की आवश्यकता है, जिसके लिए 15 नवंबर से पहले एक बैठक आयोजित की जानी है।
कांचा इलैया ने दिल्ली विश्वविद्यालय के इस फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा है ‘मेरी किताबों को वर्षों से दिल्ली विश्वविद्यालय सहित विश्व के कई विश्वविद्यालय में संदर्भ ग्रंथ के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इन किताबों में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के विचारों को ही आगे बढ़ाया गया है। इलैया ने कहा कि यह कदम उठाकर भाजपा अकादमिक छात्रवृत्ति को रोकने की कोशिश कर रही है।’

 

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