जेएनयू के मज़दूरों ने एक सुर में कहा- नहीं देंगे देश तोड़ने वाली भाजपा को वोट
आल इंडिया जनरल कामगार यूनियन के बैनर तले ठेंका कर्मचारियों ने कहा कि देश के सभी मेहनतकशों ने तय किया है कि मोदी-भाजपा सरकार फिर से सत्ता में नही आएगी.
ऐक्टू(AICCTU) से सम्बद्ध जेएनयू के ठेका कर्मचारियों ने बीते सोमवार को एक संकल्प पत्र जारी करते हुए भाजपा को वोट नहीं देने की कसम खाई. उन्होंने सामूहिक रूप से इस बात की गारंटी लेने की बात कही है जिसमें किसी भी मज़दूर का वोट भाजपा व उसके सहयोगी दलों को नही मिलेगा.
आल इंडिया जनरल कामगार यूनियन के बैनर तले ठेंका कर्मचारियों ने कहा कि देश के सभी मेहनतकशों ने तय किया है कि मोदी-भाजपा सरकार फिर से सत्ता में नही आएगी. इन्होंने जेएनयू को तबाह करने के सभी प्रयत्न किए हैं, अब हम इनका जवाब देंगे.
मई दिवस के लिए संकल्प पत्र जारी करते हुए भाकपा माले केंद्रीय कमिटी सदस्य व पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुचेता डे और यूनियन की अध्यक्ष उर्मिला चौहान ने कर्मचारियों को संबोधित किया. मीटिंग में अपनी बात रखते हुए यूनियन अध्यक्ष उर्मिला ने कहा, “ये बहुत अहम समय है.हम अपनी यूनियन की तरफ से इस बात की गारंटी करेंगे कि किसी भी मज़दूर का वोट भाजपा व उसके सहयोगी दलों को नही मिलेगा”
वहीं सुचेता ने कहा, “पिछले पांच साल, जेएनयू समेत देश के तमाम मज़दूरों के लिए चुनौतियों और संघर्ष से भरे रहे हैं. मोदी के पिट्ठू ‘वाइस चांसलर’ और भ्रष्ट प्रशासन ने पांच सालों में ठेकेदारों के पैसों से अपनी जेबों को गरम किया है. 2016 की फरवरी में जेएनयू को निशाना बना कर, देश भर में मोदी ने नफरत फैलाने की कोशिश की. जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कामरेड कन्हैया समेत अनेक छात्र नेताओं को झूठे मुकद्दमों में फसाने और जान से मारने तक की कोशिश की गई.”
उन्होंने आगे कहा, “प्रशासन के खिलाफ बोलनेवाले शिक्षकों को भी मोदी-भाजपा-संघ के दलालों ने चुप कराने की भरपूर कोशिश की. परंतु इन सब के बावजूद ऐक्टू ने 2 सितम्बर 2015 को ठेका कर्मचारियों को लामबंद कर, पूर्ण हड़ताल करके प्रशासन की चूलें हिला दी. 2016 फरवरी की संघ-प्रायोजित घटना के बावजूद फिर से 2 सितम्बर 2016 को हमने जबरदस्त हड़ताल किया.”
ग़ौरतलब है कि सितम्बर 2018 में यूनियन को श्रम कार्यालय से भी बड़ी जीत मिली- यूनियन द्वारा लगाए गए केस का फैसला सुनाते हुए, उप-श्रमायुक्त ने जेएनयू प्रशासन को ये आदेश दिया कि सभी ठेका कर्मचारियों को समान काम का समान वेतन दिया जाए. इन सब से घबराकर यूनियन अध्यक्ष उर्मिला व सुनीता को गैरकानूनी तरीके से काम से निकाल दिया गया.
यूनियन के सभी मज़दूरों ने इस मीटिंग में निम्नलिखित प्रस्ताव पास किए:-
- हम सभी मज़दूर धर्म-जाति-क्षेत्र-भाषा इत्यादि विभाजनों से ऊपर उठते हुए, मोदी-भाजपा को हराने के लिए वोट करेंगे.
- हम किसी भी प्रलोभन में आए बिना अपना वोट करेंगे और मज़दूर विरोधी मोदी सरकार को उखाड़ फेकेंगे.
- हम संकल्प लेते हैं कि जब तक हमारे यूनियन के अध्यक्ष कामरेड उर्मिला और कामरेड सुनीता को काम पर वापस नही लिया जाता, तब तक हम तन-मन-धन से उनका साथ देंगे और लड़ाई जारी रखेंगे.
- हम किसी भी तरह की अफवाह में नही फसेंगे और झूठे व्हाट्सएप मैसेज समाज-हित फारवर्ड नही करेंगे.
मीटिंग में यह सहमति बनी, “फासीवादी खतरे को देखते हुए, लोकसभा चुनाव में कन्हैया समेत तमाम वामपंथी और सेक्युलर उम्मीदवारों को यूनियन अपने तरफ से भरपूर सहयोग करने की कोशिश करेगी”