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झारखंड: मॉब लिंचिंग के शिकार अलीमुद्दीन के बेटे की इलाज में कमी की वजह से मौत, परिजनों ने अस्पतालकर्मियों पर लगाया हत्या का आरोप

29 जून 2017 में  अलीमुद्दीन अंसारी की कथित गौरक्षकों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी.

मॉब लिंचिंग का शिकार हुए अलीमुद्दीन अंसारी के बड़े बेटे शाहजाद की मौत इलाज में कमी की वजह से हो गई है. रांची के एक निजी अस्पताल में उसकी मौत हुई. 22 वर्षीय शहजाद अंसारी ने अपने पिता की नृशंस हत्या के बाद परिवार के साथ न्याय के लिए लड़ाई लड़ी थी.

शाहजाद अंसारी की मां मरियम खातून ने ‘ई न्यूज़रुम’ को बताया, “24 जनवरी को उसने सिरदर्द की शिकायत की थी. हम उसे एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए ले आए. सीटी स्कैन के बाद डॉक्टर ने कहा कि कोई परेशानी नहीं है. वो जल्दी ठीक हो जाएगा. हालांकि, मरियम ने अस्पताल पर बेईमानी का आरोप लगाया है, उन्होंने कहा है “अस्पताल ने मेरे बेटे की हत्या की. उसे बहुत सारे इंजेक्शन दिए गए थे, यह कहकर कि उसे सोने में मदद मिलेगी, लेकिन मेरा बेटा फिर कभी नहीं उठा. “

वहीं अलीमुददीन का दूसरा बेटा, शहबाज़ भी समझ नहीं पा रहा है कि उसके भाई की मौत कैसे हुई. शहबाज़ ने बताया कि उन्होंने  तीन साल पहले एक सिरदर्द की शिकायत की थी, लेकिन यह कभी इतनी गंभीर नहीं थी और वह जल्द ही ठीक हो जाती थी.

ई-न्यूज़रुम ने जब लेक व्यू हॉस्पिटल के प्रशासनिक प्रमुख बब्लू खान से संपर्क किया तो उनका कहना था कि अस्पताल से लापरवाही हुई है, “हमें पता नहीं था कि शहज़ाद अलीमुददीन अंसारी का बेटा था, हमने बिना उनकी आर्थिक स्थिति जाने उन्हें 4600 रुपए की दवाईयों का बिल दे दिया.”

इलाज कर रहे न्यूरोसर्जन डॉ वकार ने बताया, “मुझे पता नहीं था कि शहजाद एक मॉब लिंचिंग के शिकार का बेटा था . मैंने परिवार को मरीज को आईसीयू में शिफ्ट करने का सुझाव दिया था, लेकिन उनकी वित्तीय हालत खराब होने के कारण वे इसके लिए तैयार नहीं हो पाए. वे उसे आगे के इलाज के लिए एक सरकारी अस्पताल ले जाना चाहते थे. मेरे अनुरोध करने पर भी जब वह मुझे  असहाय दिखाई दिए तो मैं उसे डिस्चार्ज करने के लिए राजी हो गया. “

बता दें कि शहज़ाद ने अपनी मां  के साथ मिलकर पिता की हत्या के बाद न्याय पाने के लिए लड़ाई लड़ी थी. हालांकि, झारखंड़ हाईकोर्ट से सजा मिलने के कुछ महीनों के भीतर ही आरोपियों को जमानत मिल गई.

अलीमुद्दीन की भीड़ द्वारा हत्या के बाद परिवार के लिए शहज़ाद की मौत दूसरा बड़ा झटका है. बता दें कि 29 जून 2017 में  अलीमुद्दीन अंसारी की कथित गौरक्षकों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. उस पर प्रतिबंधित मांस रखने का आरोप लगाया गया था. यह हत्याकांड पूरे देश में चर्चित हुआ था.

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