क्या जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग कर पीडीपी की चाल में फंस गई मोदी सरकार? महबूबा मुफ़्ती ने खोला राज़. पढ़ें.
मेहबूबा मुफ्ती ने ट्वीट्स के ज़रिये पूरी योजना का स्पष्टीकरण किया.
राज्यपाल द्वारा जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग करने को लेकर सियासी बयानबाज़ी उफान पर है. भाजपा ने जहां इसको स्थायी सरकार के लिए ज़रूरी क़दम बताया वहीं पीडीपी का कहना है कि विधानसभा भंग कर भाजपा हमारे बिछाए जाल में फंस गई. अपने ट्वीट्स के ज़रिए महबूबा मुफ़्ती ने बताया कि हमने एक चतुराई भरा कदम उठाया जिससे बैचेन होकर भाजपा को जम्मू-कश्मीर विधानसभा को भंग करने को लिए मजबूर होना पड़ा.
दरअसल,फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली एनसी और मुफ़्ती की पीडीपी काफी समय से राज्यपाल से मांग कर रहे थे कि वे राजनीतिक अस्थिरता और विधायकों की खरीदी को रोकने के लिए राज्य की विधानसभा को भंग कर दें. लेकिन किसी भी तरह से इस राज्य में अपनी सरकार को बनाये रखने के लिए केंद्र की मोदी सरकार इस मांग को अनसुना कर रही थी.
अपने ट्वीट्स के ज़रिये मुफ्ती ने समझाया कि कांग्रेस नेता अंबिका सोनी और एनसी नेता उमर अब्दुल्ला ने मिलकर हमारे साथ एक गठबंधन सरकार बनाने की कोशिश का एक नाटक किया जबकि उनका ऐसी कोई गठबंधन की सरकार बनाने का इरादा था ही नहीं. यह भाजपा को मजबूर करने के लिए था. जैसा कि उन्होंने उम्मीद किया था, गैर-भाजपा सरकार बनने की संभावना से मोदी सरकार डर गई. इसी डर के कारण उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया जिसने उनकी राजनितिक समझ और परिपक्वता पर एक प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया. उन्होंने राज्यपाल को विधानसभा भंग करने के लिए कह दिया. ऐसा कर के अब वे शायद देश भर में एक हास्यास्पद पात्र बन जायेंगे.
महबूबा मुफ़्ती के ट्वीट्स नीचे पढ़ें-
In my twenty six year old career as a politician, I thought I had seen it all! But like they say never say never! Nevertheless, I would like to express my heartfelt gratitude to @OmarAbdullah and @Ambikasoni4 ji for helping us achieve the seemingly impossible. 1/4
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 21, 2018
Since the past five months, regardless of political affiliations, we shared the view that the state assembly be dissolved immediately to avert horse trading & defections. 2/4
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 21, 2018
Oddly enough our pleas fell on deaf ears. But who would have thought that the very idea of a grand coalition would give such jitters. 3/4
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 21, 2018
PS – In todays age of technology, it is very strange that the fax machine at HE Governor’s residence didn’t receive our fax but swiftly issued one regarding the assembly dissolution. 🤔4/4
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) November 21, 2018