भारतीय वायुसेना को आगामी दो सालों में 16 फाइटर स्क्वाड्रन की कमी से जूझना पड़ेगा
वहीं दो सालों में पाकिस्तान के पास 25 जबकि चीन के पास 42 लड़ाकू स्कवाड्रन की संख्या होगी.
भारतीय वायुसेना के पास आगामी दो सालों सिर्फ 26 स्कवाड्रन के लड़ाकू विमान रह जाएंगे. जबकि भारतीय वायुसेना के 42 स्कवाड्रन विमानों को प्राधिकृत करने की इज़ाज़त है. अगर देश में राफ़ेल और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस अपने निर्धारित समय में पहुंच जाते हैं फिर भी वायुसेना को कमी से जूझना पड़ेगा. वहीं दूसरी ओर अगले दो सालों में पाकिस्तान की वायुसेना के पास 25 स्कवाड्रन विमान और चीन की वायुसेना के पास 42 स्कवाड्रन लड़ाकू विमानों की संख्या मौजूद होगी.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक भारतीय वायुसेना के पास इस समय 30 स्कवाड्रन लड़ाकू विमान है लेकिन साल 2021-2022 में यह संख्या घटकर 26 हो जाएगी. सोवियत युग के मिग एयरक्राफ्ट के 6 स्कवाड्रन को सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा. वहीं उनकी जगह सिर्फ एक स्कवाड्रन राफ़ेल और एलसीए तेजस को शामिल किया जाएगा.
साल 2027 में 4 एलसीए तेजस शामिल होने से भारत के पास लड़ाकू स्कवाड्रन की संख्या 30 हो जाएगी. हालांकि 83 एलसीए तेजस मार्क 1 के मसौदे पर वायुसेना और एचएएल द्वारा हस्ताक्षर किया जाना बाकी है. दस्तावेज के अनुसार लड़ाकू स्कवाड्रन की संख्या 2037 तक 21 और 2042 तक 19 रह जाएगी. इस कमी की भरपाई करने के लिए योजना है कि तेजस मार्क 1 और मार्क 2, के 18 स्कवाड्रन और विदेशी लड़ाकू विमान के 6 स्कवाड्रन को लाया जाएगा.
2002 में वायुसेना के पास 42 लडाकू स्कवाड्रन थे. कारगिल युद्ध के बाद वायुसेना ने आधिकारिक रूप से 7 स्कवाड्रन मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) की जरूरत के बारे में बताया था. ताकि वायुसेना की लड़ाकू बढ़त बरकरार रहे. 2007 में यूपीए सरकार ने 7 एमएमआरसीए स्कवाड्रन के लिए निविदा मंगाई थी. जिसमें राफ़ेल को चुना गया. तीन साल बातचीत चलने के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने अप्रैल 2015 में 126 विमानों के स्थान पर 36 राफ़ेल लड़ाकू विमानों का सौदा किया था. हालांकि विपक्षी दलों समेत कांग्रेस ने मोदी सरकार पर राफ़ेल सौदे में भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ-साथ मीडिया द्वारा कई बार सवाल उठाए जाने के बावजूद 126 के बजाय 36 राफ़ेल विमानों की खरीदने के पीछे सरकार के तर्क को स्पष्ट नहीं किया है.