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नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में 4 फरवरी को ‘माकपा’ का देशव्यापी आंदोलन

पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी ने मोदी सरकार पर इस बिल का राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए इसे साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण बताया

नागरिकता संशोधन बिल को लेकर देश भर में कई जगह, संविधान के मूलभूत तत्वों से छेड़छाड़ किये जाने को लेकर नाराज़गी है. ऐसे में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी देश भर में इसका विरोध करते हुए, 4 फरवरी को आंदोलन छेड़ रही है.

एक वीडियो संदेश के ज़रिये मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि उनकी पार्टी कड़े तौर पर नागरिकता संशोधन बिल का विरोध करती है. भारत का संविधान जाति, धर्म और लिंग के आधार पर बिना किसी से भेदभाव किए हर किसी को समानता की गारंटी देता है. संविधान में धर्म के आधार पर नागरिकता तय नहीं होती है.

उन्होंने कहा कि केंद्र में मौजूदा भाजपा सरकार ऐसे प्रावधान बना रही है जिसके चलते पड़ोसी देशों के शरणार्थी, जिनमें मुस्लिमों को छोड़ कर बाकी सभी धर्मों के लोग शामिल हैं, भारत में आ सकते हैं. यह पूरी तरह से देश के संविधान का उल्लंघन है.

येचुरी के मुताबिक, “माकपा इस बिल का विरोध करती है. राज्यसभा में भी इसका विरोध किया जाएगा. न सिर्फ राज्यसभा बल्कि इसके लिए देशव्यापी विरोध भी किया जाएगा. देश के संविधान के मूलभूत तत्वों से छेड़छाड़ है ये.”

4 फ़रवरी को उन्होंने पार्टी की देश भर की सभी इकाइयों से इसके खिलाफ आंदोलन में जुड़ने को कहा. साथ ही देश भर के सभी प्रगतिशील और धर्म निरपेक्ष लोगों से भी इसमें साथ देने की अपील की है.

अपने वीडियो संदेश में मोदी सरकार पर इस बिल के राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने इसे साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करार दिया. साथ ही लोगों से संविधान के मूलभूत तत्वों से छेड़छाड़ को रोकने के लिए इस आंदोलन में साथ आने की अपील की और कहा कि इस सरकार पर दबाव बनाएं की वो इस बिल को वापिस ले.

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