नववर्ष पर महाराष्ट्र सरकार का दलितों को तोहफ़ा: भीमा कोरेगांव में इस साल रैली नहीं निकाल सकेंगे दलित समाज के लोग
बीते साल 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा का हवाला देते हुए महाराष्ट्र सरकार और पुणे पुलिस ने यह क़दम उठाया है.
भीमा कोरेगांव में बीते कई सालों से नववर्ष के मौक़े पर दलितों द्वारा निकाली जाने वाली रैली पर प्रशासन ने इस बार रोक लगी दी है. बीते साल, 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा का हवाला देते हुए महाराष्ट्र सरकार और पुणे पुलिस ने यह क़दम उठाया है.
नेशनल हेराल्ड की एक ख़बर के मुताबिक़ बीते कई महीनों से गांवों में शांति बैठकें की जा रही हैं. पुलिस ने हवाई निगरानी के लिए 12 ड्रोनों का इस्तेमाल किया है और लगभग 5000 सुरक्षाकर्मियों को भीमा कोरेगांव पहुँचने वाले रास्तों और गाँवों में तैनात किया गया है. कई जगहों पर मेटल डिटेक्टर के साथ सीसीटीवी कैमरा भी लगाए गए हैं.
पुलिस ने संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे को भी क्षेत्र से दूर रहने की हिदायत दी है. बता दें कि इन दोनों पर दलितों द्वारा बीते साल हुई हिंसा में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था.
इधर भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद को भी मुंबई में आम सभा करने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें उनके होटल में ही रोक कर रखा गया था.
गौरतलब है कि 1818 में हुई कोरेगांव की लड़ाई दलितों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है. अंग्रेजी सैनिकों से साथ मिलकर महार समुदाय के लोगों ने पेशवा बाजी राव द्वितीय को हराया था, जबकि पेशवा की सेना इनके मुक़ाबले बहुत बड़ी थी. युद्ध के दौरान मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए कोरेगांव में अंग्रेजों ने विजय स्तम्भ का निर्माण करवाया था.
पिछले साल 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़क उठी जिसके लिए कुछ लोगों ने दलितों को दोषी ठहराया और बाकि लोगों ने उच्च जाति के मराठों को दोषी ठहराया. लेकिन इस मामले में जहां पुणे पुलिस ने अब तक मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े के ख़िलाफ़ कोई चार्जशीट तैयार नहीं की है, वहीं अब तक इस मामले में 10 अन्य लोगों को हिंसा भड़काने के जुर्म में गिरफ़्तार कर लिया है जिनमें से कुछ मानवाधिकार वकील हैं, कुछ कार्यकर्ता हैं और कुछ दलित हैं.
पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार कबीर कला मंच और मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधीर धावले ने कथित तौर पर आपत्तिजनक गाने गाए, देश विरोधी भाषण दिए और समाज में अशांति फैलाने की कोशिश की. जून, 2018 में महाराष्ट्र पुलिस ने मानवाधिकार वकील सुरेन्द्र गडलिंग, सामाजिक कार्यकर्ता रोना विल्सन, महेश राउत, सुधीर धावले और नागपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर एवं सामाजिक कार्यकर्ता शोमा सेन को गिरफ़्तार किया. इसी कड़ी में अगस्त में पुणे पुलिस ने मानवाधिकार वकील सुधा भरद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, वर्नोन गोंसाल्वस, गौतम नवलखा और सुप्रसिद्ध लेखक और कवी वरवरा राव को भी गिरफ़्तार किया.