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रमन ‘राज’ में हायर एजुकेशन को लेकर अधर में छात्रों का भविष्य, कॉलेजों में टीचिंग स्टाफ की भारी कमी

सूबे के कवर्धा ज़िले के महाविद्यालयों में मात्र 25 से 30 फीसदी ही टीचिंग स्टाफ है

रमन सरकार में प्राइमरी से हायर एजुकेशन तक की हालत खस्ता है। स्कूल से लेकर कॉलेज तक शिक्षक व प्रोफेसरों की भारी कमी है। जैसे-तैसे शिक्षा व्यवस्था की गाड़ी आगे बढ़ रही है।

नईदुनिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सूबे के कवर्धा ज़िले के महाविद्यालयों में मात्र 25 से 30 फीसदी ही टिचिंग स्टाफ है। वहीं ज़िले में अब नौ शासकीय नॉन टेक्निकल कॉलेज हो चुके हैं। नए कॉलेजों में तो शिक्षकों की कमी है ही लेकिन पुराने में भी पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं।

स्टूडेंट्स इन कॉलेजों से निकलकर डॉक्टर, इंजीनियर, साइंटिस्ट, आईएएस, आईपीएस और अन्य क्षेत्र के विशेषज्ञ बनने का ख़्वाब देखते हैं, लेकिन कई महाविद्यालयों में प्राध्यापक नहीं हैं तो कहीं सहायक प्राध्यापक की बहुत ही कम संख्या है। इन महाविद्यालयों में कुल 101 सहायक प्राध्यापक के पद स्वीकृत हैं, लेकिन 65 प्राध्यापकों के भरोसे ही करीब 8000 विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं।

टेक्निकल कॉलेज की बात की जाए तो वहां 77 टिचिंग स्टाफ के जगह महज़ 20 स्टाफ से ही काम चल रहा है। कुल मिलाकर ज़िले की शिक्षा व्यवस्था हवा हवाई है। लेकिन प्रशासन का इससे कोई लेना देना नहीं लग रहा है।

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