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हरियाणा: सरकारी बाबुओं की लापरवाही और मौसम की मार, गेहूं की बिक्री का इंतजार कर रहे किसानों का टूटा सब्र, सरकार के ख़िलाफ़ जमकर की नारेबाजी

मार्केट कमेटी के सचिव से बार-बार खरीद की गुहार लगाने के बावजूद भी किसानों की समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है.

हरियाणा के कैथल ज़िले में किसानों के खून-पसीनें से तैयार फसल सरकारी कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से बर्बाद हो रही है. एक तरफ मौसम की मार पड़ने से गेहूं भीग रहा है वही दूसरी तरफ सरकारी केंद्र फसल की खरीद में लगातार देरी कर रहे हैं.

ज़िले में स्थित बडसीकरी, बालू व कैरलम में गेहूं की सरकारी खरीद अब तक शुरू नहीं हुई है. सभी सरकारी केंद्रों पर गेहूं का ढेर लगा हुआ है. लेकिन लंबे समय से गेहूं की खरीद के लिए सरकारी अधिकारियों का रास्ता देख रहे किसानों के सब्र शनिवार को टूट गया. इसके बाद किसानों ने सरकार व मार्केट कमेटी के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की.

दरअसल, बीते  शनिवार को भी बडसीकरी खरीद केंद्र पर किसान गेहूं खरीदने वाली एजेंसी का इंतजार कर रहे थे. लेकिन, उस दिन भी कोई खरीद ना आने से किसान आक्रोशित हो गए.

दैनिक सवेरा अख़बार  के मुताबिक किसानों के प्रदर्शन को देखकर आढ़ती (एजेंट) भी उनके समर्थन में आ गए और सरकार के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की.

कई किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि वे एक सप्ताह से अपने गेहूं की फ़सल को लेकर मंडी में बिक्री का इंतजार कर रहे हैं. बारिश होने के कारण गेहूं भीग गया है. मार्केट कमेटी के सचिव से बार-बार खरीद की गुहार लगाने के बावजूद भी किसानों की समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है.

दैनिक सवेरा  के अनुसार, आढ़तियों का कहना था कि किसान कई दिनों से मंडी में डेरा जमाए हुए है. जिसके कारण किसानों के साथ-साथ अन्य लोगों को भी परेशानी हो रही है.

मार्केट कमेटी के नोडल अधिकारी एसडीएम अनिल नागर ने दैनिक सवेरा को बताया, “खरीद कार्य शुरू होने में देरी होने के पिछे कुछ तकनीकी कारण हैं. पहले खरीद केंद्रों में खरीद के लिए एफसीआई को अधिकृत किया गया था लेकिन बाद में खरीद कार्य हैफेड को सौंप दिया गया.” उन्होंने कहा, “शनिवार को यदि नहीं हो सका तो रविवार को खरीद कार्य अवश्य शुरू हो जाएगा.”

वहीं, इस बारे में हैफेड के डीएम वीपी मलिक का कहना है, “हैफेड ने मंडी से गेहूं की खरीद के लिए पूरी तैयारी कर ली थी. लेकिन तीन केंद्रों की खरीद का कार्य मंडी को सौंप दिने से समस्या पैदा हो गई. क्योंकि हैफेड के पास इन तीनों केंद्रों से गेहूं की खरीद के लिए ना तो मैन पावर थी और ना ही बारदाना. लगभग 60 हजार टन गेंहू की खरीद के लिए एक आधारभूत ढांचा तैयार करने की वजह से खरीद कार्य शुरू करने में देरी हो गई.”

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