आज से 5 साल पहले सेना में किसी पार्टी का दबदबा नहीं था लेकिन मोदी ने ऐसा किया- सेना के राजनीतिकरण को लेकर पूर्व सैनिकों ने जताया रोष
पूर्व सैनिकों ने आरोप लगया कि प्रधानमंत्री मोदी जनता को बेवकूफ बना रहे हैं और सेना का राजनीतिकरण कर रहे हैं.
हरियाणा के रोहतक में एक ऐसा गांव है जहां से सेना के कई जवान निकलते हैं. हर घर से परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना में है. लेकिन गांव के रिटायर सैनिक प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और सेना के राजनीतिकरण से खासा गुस्सा हैं.
पूर्व सैनिकों ने आरोप लगया कि प्रधानमंत्री मोदी जनता को बेवकूफ बना रहे हैं और सेना का राजनीतिकरण कर रहे हैं.
रोहतक के विषाण गांव के एक पूर्व सैनिक ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, “मोदी जी से कहना चाहता हूं कि वह जो सच है वहीं बोलिए. जनता को बेवकूफ न बनाएं.”
Ex-Servicemen from Haryana are so unhappy with Modi on a range of issues starting from The flawed implementation of OROP, blatant politicisation of armed forces, Modi taking credit for forces achievements etc.
They question Pulwama blast too
pic.twitter.com/Oo0r3HXkUa— Ravi Nair (@t_d_h_nair) May 10, 2019
एक अन्य जवान ने कहा, “अफसर और जवान में बहुत फर्क है. यहां शरीर की भी बोली लगती है. जवान का हाथ कटता है तो 40-50 हजार रुपए दिए जाते हैं वहीं जब अफसर का हाथ कटता है तो उन्हें 2 लाख रुपए दिए जाते हैं. हर साल लगभग 250 से 300 जवान आत्महत्या करते हैं. इसका खुलासा तब होता है जब राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान रक्षा मंत्री जवाब देते हैं.”
एक पूर्व सैनिक ने बताया, “आज से 5 साल पहले यह सवाल ही नहीं उठता था कि फौज किस पार्टी के साथ है. आज मोदी की वजह से कुछ जवान भाजपा के साथ खड़े हैं. सेना को अपना काम करना चाहिए. अगर सेना में राजनीति आ गई तो सेना पूरी तरह से बेकार हो जाएगी.”
गांव के पूर्व सैनिकों ने वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सैनिक और अफसरों की पेंशन और उनकी विधवाओं को मिलने वाली पेंशन में बहुत फर्क है. एक सैनिक की बीवी को 9 हज़ार रुपए और अफसर की बीवी को 83 हज़ार रुपए मिलते हैं. यानी पेंशन में लगभग 53 हजार से ज्यादा का फर्क होता है.
पुलवामा हमले को लेकर भी पूर्व सैनिकों ने मोदी सरकार की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि सरकार अपनी सुरक्षा को लेकर लाखों खर्च करती है. लेकिन सैनिकों को हवाई रास्ते के जरिए नहीं ले जाया गया. अगर सीआरपीएफ जवानों को हवाई रास्ते ले जाया जाता तो पुलवामा जैसा बड़ा हादसा नहीं होता.
पीएम मोदी के ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान पर तंज सकते हुए पूर्व सैनिकों ने कहा, “जब असली चौकीदार यानी तेज बहादुर यादव वाराणसी से पीएम मोदी का मुकाबला करने चुनावी मैदान में उतरे तो पीएम मोदी को लगा असली चौकीदार आ गया. इसलिए उनका नामांकन रद्द कर दिया गया.”