परसाई ने कभी कहा था- सबसे अधिक खतरा गणतंत्र को धर्म आधारित साम्प्रदायिक राजनीति से है
“भारत की एक पार्टी का प्रमुख कार्यक्रम और मत माँगने का एकमात्र वादा है – हम मस्जिद की जगह मंदिर बना देंगे. हम तो इस पर रोते हैं. विदेशी हँस सकते हैं.”
सबसे अधिक खतरा गणतंत्र को धर्म आधारित साम्प्रदायिक राजनीति से है. दुनिया हंसती होगी, इस राजनीति से. राजनीतिक दलों का आधार आर्थिक, सामाजिक कार्यक्रम होते हैं. हर पार्टी दुनिया मे अपने घोषणा-पत्र के द्वारा यह बताती है कि यदि हम सत्ता में आए, तो यह विकास करेंगे, और औधोगिक वस्तुओं का उत्पादन इतना होगा, गरीबी इस तरह मिटाएंगे.
दुनिया के लोग चकित होंगे कि भारत की एक पार्टी का प्रमुख कार्यक्रम और मत माँगने का एकमात्र वादा है – हम मस्जिद की जगह मंदिर बना देंगे. हम तो इस पर रोते हैं. विदेशी हँस सकते हैं. देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था. बँटवारे में दस लाख लोग मरे थे. हमने कुछ नहीं सीखा.
आज देश की हवा में जहर है. यह आकस्मिक और कुछ समय का आवेश-उन्माद नहीं है. यह ठंडे दिमागों से बनाई गई एक योजना है, जिसका उद्देश्य साम्प्रदायिक नफरत, टकराव और विभाजन के द्वारा देश की सत्ता पर कब्जा करना है. इस राजनीति ने कितने दंगे कराए, कितनी जानें लीं, कितनी सम्पति नष्ट की. आदमी आदमी अजनबी हो गया है.
कई सालों के मित्र अलग-अलग हो गए. सामाजिक संबंध बिखर गए. मैं सत्य कहता हूँ कि तीस-तीस सालों के मेरे मित्रों से जिनसे मैं खुलकर बातें करता था, अब हिचक से सावधानी से बात करता हूँ. इस राजनीति ने काफी हद तक समाज को बाँट दिया.
आवारा भीड़ के खतरे