बुलेट ट्रेन परियोजना के ख़िलाफ़ एक हज़ार किसानों की गुजरात हाईकोर्ट में याचिका, किसानों ने कहा- बिना सहमति के हो रहा है अधिग्रहण
किसानों का आरोप है कि गुजरात सरकार बुलेट ट्रेन के लिए भू-अधिग्रहण कानून को कमज़ोर करने में लगी हुई है।
भारत में बुलेट ट्रेन चलाना एक बहस का विषय रहा है। कुछ दिन पहले एक मीडिया रिपोर्ट में यह बताया गया था कि बुलेट ट्रेन चलाने के लिए जिन ज़मीनों का अधिग्रहण होगा उनके लिए ज़्यादा मुआवजा दिए जाएंगे। इससे अब जमीन अधिग्रहण की समस्या कम हो जाएगी। लेकिन यह दावे तब फुस्स पटाखा साबित हो गए जब क़रीब एक हज़ार किसानों ने गुजरात उच्च न्यायालय में हलफ़नामा दायर कर परियोजना का विरोध किया है।
बीबीसी हिंदी की एक ख़बर के मुताबिक़ गुजरात उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ हाई स्पीड रेल परियोजना के लिए ज़मीन अधिग्रहण को चुनौति देने वाली पांच याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
गौरतलब है कि इस 1.10 लाख करोड़ की महत्वकांक्षी परियोजना से काफ़ी किसान प्रभावित हुए हैं। कई किसानों की खेती की ज़मीन इस परियोजना के क्षेत्र में आ रही है। किसान नहीं चाहते कि परियोजना के लिए उनके ज़मीन का अधिग्रहण किया जाए।
अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार किसानों का कहना है कि मौजूदा भू-अधिग्रहण प्रक्रिया इस परियोजना के लिए भारत सरकार को सस्ते दर पर क़र्ज़ मुहैया कराने वाली जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी के दिशानिर्देशों के भी विपरीत है।
किसानों का आरोप है कि गुजरात सरकार बुलेट ट्रेन के लिए भू-अधिग्रहण कानून को कमज़ोर करने में लगी हुई है। प्रदेश सरकार द्वारा किया गया संशोधन अपने आप में जेआईसीए के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। इसमें किसानों की सहमति ही नहीं ली गई।