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ग्राउंड रिपोर्टः मध्यप्रदेश में शिवराज शासन में भारी संख्या में हुई “गौमाता” की मौत, सरकारी गौशालों में गई 3,800 से अधिक गायों की जान

आरटीआई के मुताबिक 2017 में सबसे अधिक 1,847 गायों की मौत हो गई थी. तब राज्य में भाजपा सरकार ने गौ संवर्धन बोर्ड का गठन किया था.

इसे विरोधाभास कहा जाए या पाखंड? एक आरटीआई में खुलासा हुआ है कि 2015 से 2018 के बीच भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में मध्यप्रदेश के 28 सरकारी गौशालों में 3,826 गायों की मौत हुई है.

आरटीआई आवेदनकर्ता गौरव मिश्रा ने न्यूज़सेंट्रल24×7  को बताया कि हालांकि सरकारी दस्तावेज़ों में असल आंकड़े सामने नहीं आ पाते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि हर रोज दर्जनों मवेशियों की तस्करी की जाती है. उन्होंने कहा कि ज्यादातर गौशाला भाजपा के करीबियों का है.

बीते साल दिसम्बर महीने तक मध्यप्रदेश में 15 सालों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी. गौरक्षा और गौमाता के नाम पर भाजपा की आक्रामकता ने देश में मॉब लिंचिंग की कई घटनाओं को अंजाम दिया है.

मानव अधिकारों से जुड़े एक रिपोर्ट के मुताबिक मई 2015 से दिसंबर 2018 के बीच कम से कम 44 लोगों की मौत गाय के नाम पर मॉब लिचिंग के कारण हुई है. इन 44 में से 36 लोग मुसलमान थे. इसी दौरान 100 अलग अलग घटनाओं में देशभर में 280 लोग जख़्मी हो गए थे.

गौमाता

आरटीआई के मुताबिक 2017 में सबसे अधिक 1,847 गायों की मौत हो गई थी. तब राज्य में भाजपा सरकार ने गौ संवर्धन बोर्ड का गठन किया था और इसके अध्यक्ष के तौर पर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी नामक संन्यासी की नियुक्ति की गई थी.

आंकड़े के मुताबिक 2017-18 में 1,363 पशुओं की मौत हुई थी, जबकि 2015-16 में यह आंकड़ा मात्र 616 था. हालांकि, अगर इन गौशालाओं में रखे जा रहे पशुओं की कुल संख्या से मृत्यु दर की तुलना की जाए, तो और भी अधिक चौंकाने वाले परिणाम सामने आते हैं.

प्रतीकात्मक चित्र (साभार-फ़ेसबुक)

2015-16 में प्रदेश के 28 गौशालाओं में 6127 गाय थे. उस साल इनमें से 616 गायों की मौत के बाद कुल स्टॉक में 10 प्रतिशत की कमी हो गई. इसके बाद अगले साल कुल गायों की संख्या 5,894 पर आ गई और इसके बाद 1,847 पशुओं की मौत हुई यानी 31 प्रतिशत पशु इस साल मारे गए. इसके बाद 2017-18 के साल में पशुओं की संख्या बढ़कर 6,426 पर आ गई और इस साल 1,363 गायों की मौत हुई.

आंकड़ों में ये उतार चढ़ाव देखकर आरटीआई आवेदनकर्ता मिश्रा को शक हुआ. लगातार तीन सालों तक इस तरह के उलट फेर सामान्य बात नहीं है. उनका सवाल है कि अगर इन गौशालाओं में मेडिकल की सुविधा अच्छी नहीं है तो फिर 2015-16 में मरने वाले गायों की संख्या कम क्यों थी और अगर अगले साल गौशाला की स्थिति में सुधार का दावा किया जाता है तो फिर मौत के आंकड़ों में बढ़ोतरी क्यों हुई? भाजपा सरकार ने प्रत्येक पशु पर होने वाले खर्चे में बढ़ोतरी की फिर भी 2018 में मरने वाले कुल गायों की संख्या में वृद्धि क्यों हुई?

2015-16 में सरकार गौशालाओं के एक गाय के लिए 633 रुपए खर्च करती थी, दो साल बाद इसे बढ़ाकर  1,048 रुपए प्रति मवेशी किया गया. खर्च में बढ़ोतरी होने के बाद भी गायों की स्थिति में कोई सुधार नहीं देखी गई.

भोपाल के छोला रोड पर बना जीव दया गौरक्षण केंद्र इस शहर का सबसे बड़ा गौशाला है. बीते साल यहां 2,414 गायों ने दम तोड़ा था. 2017-18 में पशुओं की मौत का आंकड़ा 1,317 था. आरटीआई आवेदनकर्ता मिश्रा बताते हैं कि इस गौशाले की देखरेख स्थानीय भाजपा पार्षद आशा जैन के पति अशोक जैन द्वारा की जाती है.

2016-17 में गौशाला के कुल पशुधन का लगभग 77% नष्ट हुआ. यहां रहने वाले 2,181 गायों में से 1,690 गाय मर गए लेकिन फिर भी पशुपालन विभाग ने सुध लेना जरूरी नहीं समझा. अगर तुलना करें तो 2015-16 में इस गौशाला में 1,820 गाय थे, जिसमें से 406 की मौत हुई थी.

न्यूज़सेंट्रल24X7  से बातचीत में अशोक जैन ने बताया, “मेरे गौशाला में ज्यादातर वही गायें आती हैं जिनका स्वास्थ्य ख़राब होता है. सच तो यह है कि बहुत सारी गायें हमारे गौशाला में आने के रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं वही दूसरी गायें यहां आने के कुछ दिनों के भीतर ही मर जाती हैं. इसके पीछे कारण यह होता है कि ये गायें या तो काफ़ी बूढ़ी होती हैं या फिर इनका स्वास्थ्य बहुत ख़राब होता है.” उन्होंने कहा कि उनका गौशाला समाज की भलाई के लिए काम करता है और सरकार से मिलने वाले पैसे को नियमों के मुताबिक ख़र्च करता है.

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2017 में आगर जिले में एक गौ अभयारण्य का निर्माण कराया. कहा गया कि यह अपनी तरह का पहला अभयारण्य है. हालांकि भारी संख्या में गायों की मौत और फंड की कटौती को लेकर यह अभयारण्य विवादों में बना रहा.

आश्चर्य की बात नहीं है कि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने भी गाय के नाम पर राजनीति का इस्तेमाल किया था. कांग्रेस पार्टी का वादा था कि जीतने पर प्रदेश के हर पंचायत में गौशाला का निर्माण कराया जाएगा.

पशुपालन विभाग के मंत्री लखन सिंह ने न्यूज़सेंट्रल24X7  से बातचीत में बताया, “इस पैमाने पर गायों की मौत चिंताजनक विषय है. मैं अधिकारियों से बात करूंगा और इसपर संज्ञान लूंगा.”

न्यूज़सेंट्रल24X7  ने भारतीय जनता पार्टी से भी संपर्क किया. पार्टी के प्रवक्ता राहुल कोठारी का कहना था कि हमारी पार्टी के लिए गाय सबसे बड़ी प्राथमिकता है. इस मामले पर आरटीआई के दस्तावेज़ देखने के बाद ही कोई बयान दे पाएंगे. हालांकि आरटीआई दस्तावेज़ भेजे जाने के बाद राहुल कोठारी ने न्यूज़सेंट्रल24X7  के फोन कॉल का कोई जवाब नहीं दिया.

इसी बीच कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने गायों की भारी संख्या में मौत के पीछे भारतीय जनता पार्टी की सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. न्यूज़सेंट्रल24X7  से बात करते हुए उन्होंने बताया, “शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने व्यापक पैमाने पर धांधली की थी, जो अब सामने आ रही है. हम इन सबकी जांच कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी गाय के नाम पर सिर्फ राजनीति करती है जबकि हमलोग असल में गाय के लिए काम कर रहे हैं.”

(लेखक भोपाल में रहकर स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे हैं. वे राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे 101Reporters.com से जुड़े हैं.)

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