सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला ताक पर: भारतीय सेना रूढ़िवादी, इसलिए समलैंगिकता को सेना में जारी नहीं रखा जा सकता- सेनाध्यक्ष बिपिन रावत
सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने कहा कि हम गे सेक्स को सेना में अनुमति देने के बारे में नहीं सोच सकते हैं.
समलैंगिकता को लेकर पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को निरस्त करके ऐतिहासिक फ़ैसला दिया था. लेकिन भारतीय सेनाध्यक्ष बिपिन रावत का कहना है कि इस फ़ैसले को सेना में जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.
दरअसल, गुरुवार को मीडिया से बातचीत करते हुए सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने कहा कि भारतीय सेना में समलैंगिकता या गे सेक्स को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सेना किसी कानून से बड़ी नहीं है. लेकिन भारतीय सेना में गे सेक्स को अनुमति देना संभव नहीं होगा.
जनसत्ता की ख़बर के अनुसार सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने कहा कि सेना रूढ़िवादी है. सेना एक परिवार है, हम इस फ़ैसले को सेना में जारी रखने की इज़ाज़त नहीं दे सकते हैं. क्योंकि जवानों का आचरण सेना अधिनियम द्वारा नियंत्रित होता है. उन्होंने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा कि सेना में ऐसा कुछ हो सकता है. हम कभी इसकी अनुमति नहीं देते इसलिए सेना अधिनियम में इस फ़ैसले को जगह नहीं दी जा सकती है.
उन्होंने कहा कि आपको प्राप्त होने वाले कुछ अधिकार और विशेषाधिकार हमारे पास नहीं होते हैं. वहीं दूसरी तरफ सेना प्रमुख की टिप्पणी पर एलजीबीटी अधिकारों के लिए काम करने वाले अशोक रो कवि ने कहा कि मैं इस बात से सहमत हूं कि सेना अधिकारियों के निजी जीवन में अनुशासन होना चाहिए. लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे इसे नियंत्रित कर सकते हैं.