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एफ़टीआईआई की छात्रा ने कहा- यौन शोषण के ख़िलाफ़ आवाज उठाने की मिल रही सजा

छात्रा ने कहा है कि उसने संस्थान के आंतरिक कमेटी से यौन शोषण की घटना की शिकायत की थी, जिसके बाद संस्थान के निदेशक उसे परेशान कर रहे हैं।

देशभर में #metoo कैंपेन के जरिए महिलाएं निडर होकर यौन शोषण की घटनाओं को लेकर सामने आ रही हैं। वहीं दूसरी ओर यौन शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के कारण देश के एक प्रतिष्ठित संस्थान में छात्रा को परेशान किया जा रहा है।

फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) की अंतिम वर्ष की छात्रा ने कहा है कि जबसे उसने संस्थान में अपने साथ हुए यौन शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई है, तब से संस्थान के निदेशक उसे परेशान कर रहे हैं। छात्रा ने संस्थान के निदेशक भूपेंद्र कैंथोला पर डराने, काम में बाधा उत्पन्न करने और फ़िल्मी करियर बर्बाद करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। इस बाबत छात्रा ने सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय को 4 पन्नों की चिट्ठी भी लिखी है।

फ़र्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार संस्थान के एक प्रोफ़ेसर पर पिछले साल सितंबर में तीन लड़कियों ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसी मामले में उक्त छात्रा ने तीनों लड़कियों का साथ दिया था। छात्रा का कहना है कि जिस प्रोफ़ेसर पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, वह डायरेक्टर के काफ़ी करीबी थे। इसी वजह से उसे सजा दी जा रही है।

इसके साथ ही छात्रा का कहना है कि अप्रैल 2018 में संस्थान के छात्रों का एक ग्रुप वर्कशॉप के लिए औरंगाबाद गया था। वहां उसका एक सहपाठी रात को जबरन उसके होटल के कमरे में घुस आया और उसके साथ बुरा व्यवहार करने लगा। इसके बाद छात्रा ने एफटीआईआई की इंटर्नल कंप्लेंट्स कमेटी (आईसीसी) में इसकी शिकायत की थी।

इस घटना के बाद ग्रुप में मौजूद सीनियर प्रोफ़ेसर को हटा दिया गया था और आरोपी छात्र को तीन महीने के लिए हॉस्टल से सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन, संस्थान के प्रशासन ने इसकी सज़ा छात्रा को देनी शुरू कर दी। अकादमिक अनुशासन का हवाला देकर इस साल अगस्त माह में छात्रा को पूरे सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया गया। यही नहीं एफ़टीआईआई प्रशासन ने डिप्लोमा फ़िल्म में काम करने से भी छात्रा पर रोक लगा दी।संस्थान के निदेशक भूपेंद्र कैंथोला ने इन आरोपों को गलत और मनगढ़ंत बताया है।

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