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राफ़ेल सौदा: सही नहीं है सीलबंद लिफ़ाफे में दस्तावेज़ मंगाने वाली व्यवस्था, पूर्व न्यायाधीश जे चेलमेश्वर ने जताया विरोध

उन्होंने कहा है कि सीलबंद रिपोर्ट को स्वीकार करने का कोई नियम नहीं है और न ही ऐसा करना सही है.

राफेल सौदे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जे चेलमेश्वर ने कहा है कि अगर इस मामले की सुनवाई उनके जिम्मे होती तो वे कभी भी सरकार से “सीलबंद लिफाफे” में दस्तावेज़ों को नहीं मंगाते. उन्होंने यह भी कहा कि न तो इस तरह का कोई नियम है और न ही ऐसा करना सही था.

न्यायाधीश चेलमेश्वर ने कहा, “कानून के अनुसार कुछ असाधारण परिस्थितियों में जानकारियों को गोपनीय रखने के लिए सीलबंद लिफ़ाफे में रिपोर्ट मंगाई जा सकती है. साथ ही किन परिस्थितियों में सीलबंद लिफ़ाफे की जरूरत पड़ती है यह एक व्यक्तिगत विश्लेषण का विषय है. लेकिन हर मामले में ऐसा करना उचित नहीं है. अगर मैं इस मामले को देख रहा होता तो कभी भी सीलबंद लिफ़ाफे में जानकारी नहीं मंगाता.

इकनोमिक टाइम्स नाउ के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ दस्तावेज़ कुछ असाधारण मामलों में ही सीलबंद लिफाफों में लिए जाते हैं. उन्होंने कहा, “सीलबंद लिफ़ाफे वाली व्यवस्था हमारे न्याय प्रणाली में सही नहीं है. बहुत ही कम मामलों में सीलबंद लिफाफों की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, जहां जानकारी की सुरक्षा की ज़रुरत हो.”

ज्ञात हो कि सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में राफ़ेल विमान सौदे की जांच करने के लिए दायर सभी याचिकाएं ख़ारिज़ कर दी है.

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