अर्थव्यवस्था की धीमी पड़ी रफ़्तार: FCCI ने कहा-आर्थिक हालात काफी चिंताजनक
‘यह गंभीर चिंता का विषय है और अगर इसे तत्काल नहीं हल किया गया तो इसके दूरगामी असर होंगे.’
भारतीय उद्योग जगत ने अर्थव्यवस्था की धीमी पड़ती रफ़्तार को लेकर मोदी सरकार से गंभीर चिंता जाहिर की है. अर्थव्यस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए उद्योग जगत ने कॉरपोरेट टैक्स और बाकी करों में तुरंत राहत देने की मांग की है.
सबरंग इंडिया के ख़बर के मुताबिक दिसंबर 2018 की तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की दर 6.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी. यह दर पिछली पांच तिमाही में सबसे कम है. भारतीय उद्योग जगत ने इस बात को लेकर चिंता ज़ाहिर की है कि आगामी 31 मई को केंद्रीय सांख्यिकी विभाग चौथी और अंतिम तिमाही के आंकड़े जारी करेगा तब हालात और ख़राब हो सकते हैं. चौथी तिमाही में आशंका है कि जीडीपी की दर 6.4 प्रतिशत तक रह सकती है.
भारतीय उद्योग जगत संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री यानी FICCI ने एक बयान में कहा, ‘इकोनॉमी में सुस्ती के लक्षण न केवल निवेश और एक्सपोर्ट में धीमी रफ्तार से जुड़ा है, बल्कि इसकी वजह कमजोर पड़ता कंजम्पशन डिमांड भी है.”
FICCI ने सलाह दी है कि आने वाले बजट में सरकार को कई कदम उठाने होंगे. उन्होंने कहा कि, ‘यह गंभीर चिंता का विषय है और अगर इसे तत्काल नहीं हल किया गया तो इसके दूरगामी असर होंगे.’
केंद्रीय सांख्यिकी विभाग ने पहले ही 2018-19 में विकास दर को लेकर भविष्यवाणी करते हुए इसे 7 प्रतिशत बताया था. जबकि जनवरी में उन्होंने 7.2 प्रतिशत का अनुमान लगाया था. बता दें कि देश के औद्योगिक उत्पादन की दर में मार्च में 0.1 प्रतिशत की गिरावट आई थी.
ग़ौरतलब है कि औद्योगिक उत्पादन दर को सबसे ज्यादा मैनुफैक्चरिंग सेक्टर प्रभावित करता है और मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में भी 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. जनवरी से मार्च वाली तिमाही में अर्थव्यवस्था के धीमी पड़ती रफ़्तार को को लेकर पहले ही चिंता जताई गयी थी.
दरअसल, उद्योग जगत से जुड़े आंकड़ों यह बात सामने आई है कि सिर्फ कार और टू वीलर्स के सेल में ही गिरावट दर्ज नहीं की गयी, बल्कि हवाई यात्रियों की संख्या में भी करीब पांच साल में पहली बार साढ़े 4 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई है. इसके अलावा, टेलिकॉम सेक्टर में भी प्रति ग्राहक रेवेन्यू घटा है.