नासिक: वन अधिकार क़ानून बचाने के लिए 25,000 आदिवासियों का विरोध प्रदर्शन, मांग पूरा नहीं होने पर SDO कार्यालय का करते रहेंगे घेराव
विशाल बैठक में आदिवासियों के अधिकारों पर जघन्य हमले को लेकर केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकार की कड़ी निंदा की गई.
भारतीय वन अधिनियम में बदलाव के विरोध में मंगलवार को महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में 25,000 आदिवासी किसानों ने धरना प्रदर्शन किया. यह आंदोलन और विशाल बैठक भारतीय किसान सभा, आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच और अन्य आदिवासी संगठनों द्वारा आयोजित किए गए राष्ट्रीय विरोध का एक हिस्सा था.
विशाल बैठक में आदिवासियों के अधिकारों पर जघन्य हमले को लेकर केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकार की कड़ी निंदा की गई. इसके साथ ही यह तय किया गया कि जल,राशन, पेंशन, स्वास्थ्य और रोज़गार जैसे स्थानीय मुद्दों को उठाया जाए. स्थानीय मांगों को स्वीकार नहीं करने पर एसडीओ कार्यालय का घेराव जारी रखा जाए.

विरोध प्रदर्शन में सीपीआई एम पोलित ब्यूरो के सदस्य बृंदा करात, एआईकेएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक धवाले, एआईकेएस के पूर्व अध्यक्ष सात बार विधायक रह चुके जेपी गवित और अन्य नेता शामिल रहे.
भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धवाले ने एक ट्वीट के जरिए कहा, “23 जुलाई को नासिक में सीपीआई(एम) और एआईकेएस के नेता जेपी गवित के नेतृत्व में आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाले वन अधिकार अधिनियम पर सुनवाई से जुड़ा था. महाराष्ट्र के साथ पूरे देश में भारतीय किसान सभा ने कार्रवाइयों का आयोजन किया था.”
This huge action at Kalwan on July 23, led by CPI(M) and AIKS leader J P Gavit, MLA, was held on the eve of the crucial hearing on the Forest Rights Act case in the Supreme Court today. Several other actions were organised by the AIKS throughout the country. https://t.co/icmkNIRw6Z
— Dr. Ashok Dhawale (@DrAshokDhawale) July 24, 2019
बता दें कि मोदी सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इसी साल भारतीय वन अधिनियम, 1927 में पहले व्यापक संशोधन का मसौदा तैयार किया है, आदिवासी समुदाय इसका विरोध कर रहा है.