2007 में असम की आदिवासी महिला को बेरहमी से पीटते हुए तस्वीर को बंगाल की हालिया घटना बताकर फैलाया गया
ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि यह तस्वीर पश्चिम बंगाल से संबंधित नहीं, बल्कि 2007 में असम में हुई एक घटना की है।
31 अगस्त को एक फेसबुक उपयोगकर्ता हिंदू अखिलेश गुप्ता ने पुरुषों के एक समूह द्वारा एक महिला को नग्न करने और सड़क पर दौड़ाकर पीटने की तस्वीर शेयर की। फोटो को प्रसारित करने के लिए कहा गया कि पश्चिम बंगाल में कोंग्रेस की रैली में भाजपा-समर्थक और मोदी-समर्थक नारे लगाने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस हिंदू महिला की पिटाई कर दी। इस पोस्ट को 15,000 बार शेयर किया गया।

हिंदू अखिलेश गुप्ता का फेसबुक पर परिचय बताता है कि वह ‘भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करते हैं’। उनकी टाइमलाइन सरकार के पक्ष में और अक्सर ही उत्तेजक कथाओं के साथ विपक्षी दलों की आलोचना करने वाले कई पोस्ट का संग्रह है।
यह तस्वीर और इसके साथ का संदेश कई अन्य लोगों द्वारा भी सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया था, जिनमें एक प्रीतम रितुजी शामिल हैं। वह ट्विटर पर खुद को “भाजपाई” के रूप में वर्णित करते हैं और रेल मंत्री पियुष गोयल के कार्यालय का ट्विटर अकाउंट उन्हें फ़ॉलो करता है।

2007 की असम की तस्वीर
ऑल्ट न्यूज़ ने तस्वीर की गूगल पर रिवर्स सर्च की और पाया कि कुछ समय से इसी संदेश के साथ यह प्रसारित हो रहा है। इसे 2016 में वी सपोर्ट नरेंद्र मोदी जी (We Support Narendra Modi Ji) नामक एक समूह में और 2017 में कई उपयोगकर्ताओं द्वारा शेयर किया गया था।

लेकिन, Alt न्यूज़ ने पाया कि यह तस्वीर पश्चिम बंगाल से संबंधित नहीं, बल्कि 2007 में असम में हुई एक घटना की है। राज्य के आदिवासी चाय श्रमिकों ने अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल होने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए थे। विरोधों के जवाब के तौर पर नाराज स्थानीय निवासियों ने तस्वीर वाली आदिवासी महिला पर हमला किया था। यह घटना उस समय विभिन्न मीडिया संगठनों द्वारा रिपोर्ट की गई थी, जिसमें द टाइम्स ऑफ इंडिया, न्यूज 18 और द टेलीग्राफ शामिल थे। एसएम होक्सस्लेयर ने पिछले साल ही इस नकली खबर को खारिज किया था।

पश्चिम बंगाल को अक्सर ही सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथी उपयोगकर्ताओं द्वारा “हिंदू विरोधी” राज्य के रूप में चित्रित करने के लिए निशाना बनाया गया है। ऑल्ट न्यूज़ ने पिछले समय में बंगाल को निशाना बनाने वाले धार्मिक विषयों समेत भ्रामक सूचनाओं के कई मामलों को उजागर किया है (1, 2, 3, 4, 5)। उत्तेजक भाषा या तस्वीर का उपयोग करके प्रचारित किसी भी जानकारी को आगे प्रसारित करने से पहले सत्यापित किया जाना चाहिए।