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अगस्त राउंड-अप: केरल की बाढ़ में झूठ का प्रलय

Alt न्यूज़ की पड़ताल- केरल बाढ़ से संबंधित झूठे, भ्रामक दावों और प्रतिवादों का सच

अगस्त में, केरल ने शताब्दी की सबसे भारी बारिश की घातक चोट झेली। सैकड़ों लोगों की मौत हुई, लाखों का विस्थापन और संपत्ति को भारी नुकसान हुआ। इस घटना की विशालता और त्रासदी, जैसे विडंबना की तरह सामने आई, उसी तरह, केरल से संबंधित झूठे और/या भ्रामक दावों और प्रतिवादों की बड़ी संख्या में गलत-सूचनाओं की सोशल-मीडिया-तंत्र में बाढ़ आ गई। मुख्यधारा की मीडिया में भी केरल के बाढ़ नहीं थे- केरल की बाढ़ के कवरेज में गलत रिपोर्टिंग के कई उदाहरण रहे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मौत भी झूठी सूचना फैलाने का अवसर बन गई।

केरल की बाढ़ से संबंधित गलत सूचनाएं

1.राहत कार्य दिखलाने के लिए आरएसएस द्वारा पुरानी तस्वीरों का उपयोग

दान की अपील के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के आधिकारिक फेसबुक पेज द्वारा तस्वीरों का एक सेट इस दावे के साथ शेयर किया गया कि तस्वीरों में केरल बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने वाले लोग सेवा भारती कार्यकर्ता थे। शेयर किए गए तस्वीरों के सेट में से एक में पृष्ठभूमि में खड़े कई लोगों के साथ, जिसमें आरएसएस की पुरानी वर्दी जैसे दिखने वाले खाकी हाफ पैंट पहने कुछ लोग शामिल हैं, एक संवाददाता दिखता है।

यह सामने आया कि इस संवाददाता की यह तस्वीर 2012 में ली गई थी, जब राज्य में बाढ़ आई थी। इस तस्वीर में शामिल संवाददाता ने उसी वर्ष तस्वीर को शेयर किया था। आरएसएस के फेसबुक पेज को बाद में अपडेट किया गया और स्पष्ट किया गया कि तस्वीर वास्तव में 2012 की थी।

2. आरएसएस के काम दिखाने के लिए पुरानी तस्वीर शेयर करते पोस्टकार्ड न्यूज़, कोयना मित्रा

नकली समाचार वेबसाइट पोस्टकार्ड न्यूज़ और अभिनेत्री कोयना मित्रा ने एक तस्वीर शेयर की जो कथित रूप से केरल में राहत कार्यों में सक्रिय आरएसएस के कार्यकर्ताओं को दिखलाती थी। इसका उद्देश्य आरएसएस के काम की सराहना करना और साथ ही उन लोगों का उपहास उड़ाना था जो आरएसएस की प्रतिबद्धता और समर्पण पर सवाल उठाते हैं।

विडंबना देखिए, पता चला कि पोस्टकार्ड न्यूज़ ने 2016 में उसी तस्वीर का, जब इसे क्लिक किया गया था, यह दावा करते हुए उपयोग किया था, कि बिहार के बाढ़ प्रभावित होने पर आरएसएस स्वयंसेवक सामाजिक सेवा में सक्रिय रूप से शामिल थे। सोशल मीडिया पर अन्य लोगों ने दावा किया कि यह तस्वीर पश्चिम बंगाल की है। हालांकि आल्ट न्यूज़ ने कोई निष्कर्ष नहीं निकाला कि तस्वीर कहां से थी, फिर भी यह स्पष्ट था कि यह तस्वीर केरल की हाल की बाढ़ से संबंधित नहीं थी।

पोस्टकार्ड न्यूज ने कुछ दिनों बाद फिर केरल में आरएसएस के झूठे राहत कार्यों को दिखलाने के लिए तस्वीरों का एक और सेट प्रकाशित किया। इनका भी केरल की बाढ़ से कोई लेना-देना नहीं था। ये 2016 की तस्वीरें थीं

3. बीजेपी मंत्रियों और सांसदों के 25 करोड़ रुपये दान देने की भ्रामक जानकारी

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा बीजेपी मंत्रियों और सांसदों की उपस्थिति में 25 करोड़ रुपये चेक लेते हुए एक तस्वीर को सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ प्रसारित किया गया कि सत्तारूढ़ दल के सदस्यों और केंद्रीय मंत्रियों ने केरल सरकार को 25 करोड़ रूपये दान दिए थे। पोस्ट व्यापक रूप से शेयर किया गया था।

दावा साफ तौर पर झूठा था क्योंकि यह धन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा केरल को दान किया गया था, न कि बीजेपी मंत्रियों और सांसदों द्वारा। चूंकि बीजेपी के सांसदों के हाथों केरल के मुख्यमंत्री को चेक प्रदान किया गया था, इसलिए उनकी एक साथ फोटो ली गई थी। इसने सोशल मीडिया में फैली कथाओं की सहायता की कि बीजेपी सांसदों ने यह राशि बाढ़ प्रभावित राज्य को दान की थी।

4. इराकी सैन्यकर्मी की तस्वीर भारतीय सेना के रूप में शेयर की

“कोई शब्द नहीं ???? सच्चे भारतीय इस तस्वीर को कभी अनदेखा नहीं कर सकते। यह हमारी सेना है … वे हमारे लिए कुछ भी करेंगे।” यह संदेश एक सैनिक की तस्वीर के साथ दिया है, जो झुका है ताकि उसकी पीठ पर पांव रखकर महिला ट्रक से बाहर निकल सके। इसे फेसबुक पेजों द्वारा साझा किया गया है जो नियमित रूप से राष्ट्रवाद और भारतीय सेना विषयक सामग्री का उपयोग अपने पाठकों के साथ भावनात्मक गड़बड़ी करने के लिए करते हैं। पोस्ट कार्ड फैन्स (Post Card Fans), इंडिया अगेन्स्ट पेड मीडिया (India against Paid Media), माई इंडिया (My India) और नरेंद्र मोदी – ट्रू इंडियन (Narendra Modi – True Indian) कुछ ऐसे पेज हैं जिन्होंने इस तस्वीर को पोस्ट किया था, जिसे हजारों बार शेयर किया गया था।

एक साधारण गूगल रिवर्स सर्च ने खुलासा किया कि यह तस्वीर, जून 2016 में आईएसआईएस से फालुजा शहर के मुक्त हो जाने के बाद, एक नागरिक की मदद करते हुए, इराक़ी पीएमयू (Popular Mobilization Units) के सदस्य की है। वास्तव में यह तस्वीर नकली समाचार के अंतरराष्ट्रीय विवाद के केंद्र में रह चुकी है। दिसंबर 2016 में, संयुक्त राष्ट्र में सीरियाई दूतावास की, इसका उपयोग यह दिखाने के लिए कि कैसे सरकारी सेनाएं अलेप्पो शहर को ‘मुक्त’ कर रही थीं, व्यापक आलोचना की गई थी।

ऑल्ट न्यूज ने देखा कि आरएसएस को केरल में राहत प्रयासों में आगे पेश करने के लिए सोशल मीडिया पर सम्मिलित खेल खेला गया। यह असंबद्ध तस्वीरों के उपयोग से सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को गुमराह करने पर केंद्रित था।

केरल की बाढ़ पर मेनस्ट्रीम मीडिया की भ्रामक खबर

1. द टेलीग्राफ की रिपोर्ट UAE राष्ट्रपति के अनाधिकारिक पेज के पोस्ट पर आधारित

बाढ़ प्रभावित केरल के लिए संयुक्त अरब अमीरात ने 700 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया है या नहीं, इस विवाद के बीच द टेलीग्राफ ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जयद अल नह्यान ने फेसबुक पेज पर इस शीर्षक से समाचार दिया है- केरल में राहत और पुनर्वास के लिए 700 करोड़ रुपये देने का यूएई वचन देता है“।(अनुवाद)

लेख में यह बताया गया कि “संयुक्त अरब अमीरात के परिचित सूत्रों ने कहा कि यह अकल्पनीय होगा कि राष्ट्रपति की आधिकारिक साइट झूठी अफवाह पोस्ट करे और इसे ​​जारी भी रखे। कुछ स्रोतों ने तो इस पोस्ट का वर्णन “अप्रत्यक्ष पुष्टि” के रूप में किया।

समाचार-रिपोर्ट पोस्ट करने वाले पेज शेख खलीफा बिन जयद अल नह्यान पर एक सरसरी नज़र डालने से ही पता चलता है कि यह संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति का आधिकारिक पेज नहीं है। अनुयायियों की संख्या और पृष्ठ पर सत्यापन की नीली टिक का नहीं होना इस तथ्य को इंगित करता है कि यह राज्य प्रमुख का आधिकारिक पृष्ठ नहीं हो सकता है। फिर भी, टेलीग्राफ ने इसे एक आधिकारिक खाता माना और तदनुसार रिपोर्ट किया।

2. रिपब्लिक टीवी, न्यू यॉर्क टाइम्स ने कर्नाटक में भूस्खलन के वीडियो को केरल का बताकर शेयर किया

रिपब्लिक टीवी के समाचार एंकर ने केरल की बाढ़ पर एक रिपोर्ट पेश करते हुए कहा, “केरल में जहां अभी तक बचाव अभियान चल रहा है, मेरे सहयोगी स्नेहेश त्रिवेन्द्रम से हमसे लाइव जुड़ रहे हैं”। केरल में बाढ़ से विनाश के प्रतिनिधि दृश्यों के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों से भी रिपोर्टिंग हुई थी।

3:28 से शुरू : रिपब्लिक टीवी के वीडियो ने एक पहाड़ी से नीचे गिरते दो मंजिला घर का दृश्य दिखलाया। स्क्रीन पर दिए पाठ के मुताबिक, ये दृश्य 17 अगस्त, 2018 के हैं। वही दृश्य द न्यू यॉर्क टाइम्स द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में इस्तेमाल किया गया था।

भूस्खलन के कारण ढलान पर दो मंजिला घर के गिरने की यह घटना कर्नाटक के कोडागु की है, केरल की नहीं। स्क्रॉलद टाइम्स ऑफ इंडिया और एनडीटीवी समेत कई मुख्यधारा मीडिया संगठनों के अलावा द न्यूज मिनट द्वारा इसकी रिपोर्ट की गई, जिसमें वीडियो का स्थान कोडागु, कर्नाटक बताया गया।

3. दैनिक भास्कर ने हाथी के बच्चे को बचाने की पुरानी तस्वीर छापी

23 अगस्त, 2018 को दैनिक भास्कर नई दिल्ली संस्करण द्वारा प्रकाशित एक लेख में हाथी के एक बच्चे की तस्वीर इस कैप्शन के साथ थी- “सेना केरल में बाढ़ में फंसे लोग के साथ जानवरों की भी मदद कर रही है। जवान ने हाथी के बच्चे को रेस्क्यू किया।” कैप्शन में बताया गया कि केरल बाढ़ के दौरान सेना द्वारा हाथी के एक बच्चे को बचाया गया था।

तस्वीर दिसंबर 2017 में तमिलनाडु में कोयंबटूर के पास मेट्टुपलायम में ली गई थी। मेट्टुपलायम के पास तैनात 28 वर्षीय फारेस्ट गार्ड पलानिचमी सरथकुमार ने, 12 दिसंबर, 2017 को जब वह रात की शिफ्ट के बाद घर जा रहा था, एक कॉल प्राप्त की। 29 दिसंबर, 2017 को बीबीसी द्वारा प्रकाशित एक लेख में सरथकुमार ने कहा, “कॉलर ने मुझे बताया कि एक महिला हाथी वानभद्र कालियाम्मन मंदिर के पास सड़क को अवरुद्ध कर रही थी।” (अनुवाद)

4. टाइम्स नाउ ने पश्चिम बंगाल के घर गिरने का फुटेज केरल का बताया

टाइम्स नाऊ के मुख्य संपादक राहुल शिवशंकर ने केरल बाढ़ पर प्राइमटाइम बहस शुरू की, “दर्शक, हम विनाश की कहानी से शुरू करते हैं, तस्वीर जो आप अपनी स्क्रीन पर लगभग 30 सेकंड में देखने जा रहे हैं, वे केरल के जलप्लावित जिलों के हैं।” इस संबोधन के साथ दिखाए गए वीडियो में एक दो-मंजिला घर बाढ़ में बह गया दिखाया। यह वीडियो कुशल नगर, केरल का होने का दावा किया गया था।

इस साल पश्चिम बंगाल का बांकुरा जिला बाढ़ से तबाह था। 7 अगस्त, 2018 को द हिंदू द्वारा प्रकाशित एक लेख में कहा गया, “सोमवार को भारी बारिश से बांकुरा जिले के कई इलाकों में बाढ़ आने के कारण दो लोगों की मौत हो गई और कम से कम 2,500 प्रभावित हुए। कई घर भी क्षतिग्रस्त हो गए।” बांकुरा में बाढ़ से दो मंजिला घर के बह जाने का दृश्य कई मीडिया संगठनों द्वारा व्यापक रूप से प्रसारित किया गया। यह वही वीडियो है जिसे टाइम्स नाउ द्वारा कुशल नगर, केरल के रूप में प्रसारित किया गया था।

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