राफ़ेल सौदे में जांच से डरकर सरकार ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजा: प्रशांत भूषण
प्रशांत भूषण ने कहा है कि सीबीआई के निदेशक का कार्यकाल न्यूनतम कार्यकाल दो सालों का होता है, दो सालों से पहले सरकार सीबीआई निदेशक को नहीं हटा सकती।
सीबीआई के भीतर जारी गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रही। सरकार ने सीबीआई के दो सबसे बड़े अधिकारियों को लंबी छुट्टी पर भेज दिया है तथा उड़ीसा कैडर के आईपीएस अधिकारी एन नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाया है। सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध हो रहा है। बताया जा रहा है कि सरकार ने संवैधानिक नियमों को ताक पर रखकर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को लंबी छुट्टी पर भेजा है।
छुट्टी पर भेजे जाने के बाद सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा ने सरकार के इस फ़ैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट 26 अक्टूबर को करेगी।
इधर, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा है कि सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर सीबीआई के निदेशक को लंबी छुट्टी भेजा है। द वायर के मुताबिक प्रशांत भूषण ने कहा है कि सीबीआई के निदेशक का कार्यकाल न्यूनतम कार्यकाल दो सालों का होता है, दो सालों से पहले सरकार सीबीआई निदेशक को नहीं हटा सकती। लेकिन, मोदी सरकार ने राकेश अस्थाना को बचाने और राफ़ेल सौदे की जांच के डर से आलोक वर्मा को हटाया है।
CBI Director's minimum tenure is 2 years; he can't be removed prematurely by the Govt. But, in order to protect #RakeshAsthana they (BJP Govt) decided to remove #AlokVerma: Lawyer and Activist @pbhushan1 on #CBIVsCBI pic.twitter.com/yQrstVC6Rt
— ET NOW (@ETNOWlive) October 24, 2018
प्रशांत भूषण ने सीबीआई के नवनियुक्त निदेशक नागेश्वर राव की नियुक्ति पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि नागेश्वर राव के ऊपर कई गंभीर आरोप लगे हैं और सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने कुछ महीने पहले ही नागेश्वर राव पर कार्रवाई करने की सिफ़ारिश की थी।
उन्होंने कहा, ‘राफेल सौदे की जांच सीबीआई नहीं कर सके, शायद इसलिए सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर को हटाया दिया है। मैं, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने आलोक वर्मा से राफ़ेल डील की जांच की मांग की थी। इसके बाद वर्मा ने राफ़ेल सौदे जुड़ी कुछ फाइलें सरकार से मांगी थी।’