दिल्ली के ईसाई कव्वाल सूफी साहिल निज़ाम ने सबको दिया धार्मिक एकता का संदेश, देखें विडियो
ईसाई कव्वाल ने कहा कि संगीत का कोई धर्म और ज़ुबान नहीं होती है. यह महसूस करने वाली चीज है.
सूफी साहिल निज़ाम उर्फ सुशील बनाड के नाम से ईसाई कव्वाल ने सभी धर्मों के त्योहारों को मानने और हिंदुस्तान को एक बनाए रखने का संदेश दिया है. सुशील बनाड ने कहा, “मेरे पहनावे को लेकर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि ये हैं क्या. मेरा एक ही जवाब होता है मैं आप हूं. जैसे आप हैं वैसे मैं हूं.”
कारवां-ऐ-मोहब्बत के साथ एक साक्षात्कार के दौरान दिल्ली के ईसाई कव्वाल सूफी साहिल निज़ाम ने कहा, “अभी तक लोग यह नहीं समझ पाते कि मेरा धर्म क्या है. लोग कहते हैं कि आप हिंदू भजन गाते हैं, मस्जिद कव्वाली गाते हैं लेकिन हमारे में इसकी इजाजत नहीं है. मैं उनसे कहता हूं कि जैसे ईसा मसीह हैं वैसे अल्लाह, राम जी, को भी सम्मान देता हूं. संगीत की कोई ज़ुबान और कोई मजहब नहीं है. संगीत एक महसूस करने की चीज है. जिसके जरिए आप सीधे अपने खुदा से बात कर सकते हैं.”
इसाई समाज में सुशील बनाड के नाम से पहचान बनाने वाले सूफी साहिल निजाम भजन, कव्वाली सब गाते हैं. उन्होंने कहा कि त्योहार हमें जोड़ते हैं. अम्माल इकबाल शाहब का शेर याद करते हुए उन्होंने कहा कि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिंदी हैं हम वतन है ये हिंदुस्तान हमारा, ये हिंदुस्तान हमारा है इसको सजाइए. इसको तोड़िए मत. हर त्योहार को खुशी से मनाइए. चाहे वो हिंदू त्योहार हो या मुस्लिम, सिख और ईसाई. सारे धर्म के भगवान सबके लिए हैं.
सुशील बनाड ने अंत में कहा, “हम प्यादे वजिरों में गिने जाते हैं, दुनिया की कोई ताकत हमें बुझा नहीं सकती, हम कांच के टुकड़े हैं मगर हीरों में गिने जाते हैं.”